नई दिल्ली: देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा गणेश उत्सव अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को हुई थी। अब अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर 25 सितंबर 2026 को श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ विघ्नहर्ता को भावुक मन से विदाई देंगे। इस बार गणेशोत्सव की अवधि, तिथियों की गणना, विसर्जन पर पंचक के प्रभाव और धार्मिक मान्यताओं को लेकर ज्योतिषियों व आचार्यों ने विशेष शास्त्रीय पहलू स्पष्ट किए हैं।
10 नहीं, इस बार 12 दिनों का क्यों हुआ गणेश महोत्सव?
सामान्यतः गणेश उत्सव 10 दिनों का माना जाता है, लेकिन इस वर्ष चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक की कुल अवधि 12 दिनों की बन रही है।
पंचांग गणना के अनुसार:
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तिथियों की वृद्धि: हिंदू पंचांग में तिथियों के क्षय और वृद्धि के कारण दिनों की संख्या में बदलाव आता है।
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भाद्रपद शुक्ल पक्ष का चक्र: 14 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से बप्पा की स्थापना हुई। इसके बाद 23 सितंबर को द्वादशी तिथि, 24 सितंबर को त्रयोदशी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तिथि लग रही है। तिथियों के सूर्योदय कालीन मान (उदयातिथि) और नक्षत्रों के संयोग से इस बार भक्तों को बप्पा की आराधना के लिए 12 दिनों का दुर्लभ और शुभ अवसर प्राप्त हुआ।
विसर्जन के दौरान पंचक का साया: क्या पड़ेगा असर?
अनंत चतुर्दशी के दिन पंचक का प्रभाव रहने को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में संशय है।
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ज्योतिषीय मत: आचार्यों के मुताबिक, पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा या लकड़ी-तृण आदि का संचय वर्जित माना जाता है, लेकिन देवताओं की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और विहित उत्सवों के विसर्जन पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
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शुभ चौघड़िया में विसर्जन: पंचक काल के बावजूद दिन के शुभ चौघड़िया (अमृत, शुभ, चर और लाभ) तथा अभिजीत मुहूर्त में विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ गणपति प्रतिमा का विसर्जन पूरी तरह शास्त्रसम्मत और मंगलकारी माना गया है।
विसर्जन के बाद सपने में बप्पा का दिखना: क्या हैं शास्त्रीय संकेत?
गणेश विसर्जन के बाद कई श्रद्धालुओं को सपने में भगवान गणेश की प्रतिमा या उनकी कृपा से जुड़े दृश्य दिखाई देते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इसे अत्यंत शुभ माना गया है:
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कष्टों से मुक्ति का संकेत: यदि विसर्जन के बाद गणपति जी सपने में प्रसन्न मुद्रा में दिखाई दें, तो यह माना जाता है कि पूजा स्वीकार हो चुकी है और घर-परिवार में आ रही अड़चनें व विघ्न दूर होने वाले हैं।
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आर्थिक समृद्धि और शुभ समाचार: सपने में मोदक, दूर्वा या बप्पा का आशीर्वाद मिलना निकट भविष्य में आर्थिक लाभ, कार्यक्षेत्र में सफलता और किसी बड़े शुभ समाचार के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
पर्यावरण अनुकूल विसर्जन की अपील
स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण समितियों ने आम जनता से अपील की है कि नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए मिट्टी से बने ‘इको-फ्रेंडली’ गणेश जी का विसर्जन घरों में कुंड बनाकर या प्रशासन द्वारा निर्धारित कृत्रिम विसर्जन कुंडों में ही करें, ताकि आस्था के साथ पर्यावरण की शुचिता भी सुरक्षित रहे।

