पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मंच डब्ल्यूएचओ ने शुरू किया दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पुस्तकालय

नई दिल्ली में पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पारंपरिक पूरक और एकीकृत चिकित्सा के लिए दुनिया का सबसे व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इस डिजिटल पुस्तकालय का नाम ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी रखा गया है। इसका उद्देश्य विश्वभर में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से जुड़े ज्ञान को एक मंच पर लाना सुरक्षित रखना और सभी के लिए सुलभ बनाना है।

डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की निदेशक डॉ श्यामा कुरुविला ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा अब एक उभरती हुई वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता बन चुकी है। उन्होंने साक्ष्य आधारित शोध और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण पर जोर दिया। यह पहल डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन स्ट्रैटेजी 2025 से 2034 के अनुरूप है जिसका लक्ष्य मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शोध और आदिवासी व स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के सम्मान को बढ़ावा देना है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया के 170 से अधिक सदस्य देशों में किसी न किसी रूप में पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। इसके बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय तक वैज्ञानिक शोध और स्वास्थ्य नीतियों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका। इसी कमी को दूर करने के लिए यह डिजिटल पुस्तकालय विकसित किया गया है जिसमें आयुर्वेद योग पारंपरिक दाई प्रथा लोक चिकित्सा और अन्य स्वदेशी उपचार प्रणालियों से जुड़ा ज्ञान संकलित किया गया है।

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 15 लाख से अधिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। इनमें शोध लेख जर्नल वीडियो नीति दस्तावेज और अन्य मल्टीमीडिया सामग्री शामिल है। इसके साथ ही छह क्षेत्रीय पोर्टल और 194 देशों के लिए अलग अलग पेज तैयार किए गए हैं। इन देश विशेष पेजों पर नियम कानून शोध विश्लेषण डाटाबेस और पॉडकास्ट जैसी सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

पुस्तकालय में आयुर्वेद योग पारंपरिक दाई प्रथा इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी और इंटीग्रेटेड पीडियाट्रिक्स जैसे विषयों पर विशेष पेज तैयार किए गए हैं। पहला थीमैटिक पेज अमेरिका महाद्वीप में पारंपरिक दाई प्रथा पर केंद्रित है जिसमें अफ्रीकी मूल और आदिवासी दाइयों के अनुभवों को वीडियो और दस्तावेजों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कम और मध्यम आय वाले देशों के संस्थानों को पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े शोध और साहित्य तक मुफ्त या कम लागत पर पहुंच दी जाएगी।

डब्ल्यूएचओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2023 में गांधीनगर में आयोजित जी 20 स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक ज्ञान भंडार बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी सोच के तहत इस डिजिटल पुस्तकालय को भारत में लॉन्च किया गया जो वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

इस वैश्विक सम्मेलन के दौरान भारत की स्वास्थ्य विरासत को निवेश का सहारा भी मिला है। केंद्र सरकार की अपील पर डब्ल्यूएचओ ने स्वास्थ्य विरासत नवाचार पहल के तहत पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा से जुड़े 21 उच्च प्रभाव वाले नवाचारों को वैश्विक मंच प्रदान किया है। इनमें कई महत्वपूर्ण भारतीय नवाचार शामिल हैं जिन्हें निवेश से जोड़ने और बड़े स्तर पर लागू करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

आयुर्वेद योग यूनानी सिद्ध और लोक चिकित्सा जैसी समृद्ध परंपराओं वाले भारत के लिए यह पहल न केवल सांस्कृतिक गौरव बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार भी खोलती है

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