नई दिल्ली: केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने ऑनलाइन खरीदारी को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ई-कॉमर्स नियमों में बड़ा संशोधन किया है। ‘उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियमावली, 2026’ के तहत फर्जी छूट, भ्रामक सर्च परिणाम और डिजिटल धोखाधड़ी (डार्क पैटर्न) पर रोक लगाने की तैयारी की गई है। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर आई कुल शिकायतों में से लगभग 29 प्रतिशत (5 लाख से अधिक) मामले अकेले ई-कॉमर्स से जुड़े थे। इसी को देखते हुए प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
नए नियमों से ग्राहकों को क्या लाभ मिलेगा?
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राष्ट्रीय हेल्पलाइन से सीधा जुड़ाव: हर ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) के सिस्टम से जुड़ना अनिवार्य होगा, ताकि शिकायतों का तेजी से निपटारा हो सके। ग्राहक को उसकी दर्ज शिकायत की आधिकारिक प्रति भी दी जाएगी।
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फर्जी छूट पर रोक: कंपनियां अब दाम बढ़ाकर भारी डिस्काउंट का झूठा दावा नहीं कर सकेंगी। यदि कोई छूट दिखाई जा रही है, तो कंपनी को पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत (पूर्व मूल्य) भी साथ में दर्शानी होगी।
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सर्च रिजल्ट में पारदर्शिता: ग्राहकों की सर्च के साथ हेरफेर नहीं किया जा सकेगा। अगर कोई उत्पाद विज्ञापन या पैसे देकर ऊपर दिखाया गया है (प्रायोजित लिस्टिंग), तो उस पर साफ-साफ इसका उल्लेख करना होगा।
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डार्क पैटर्न पर पाबंदी: ग्राहकों को धोखे से सब्सक्रिप्शन दिलाने या जबरन अतिरिक्त शुल्क जोड़ने वाले भ्रामक वेब-डिजाइन पर सख्त रोक रहेगी। कंपनियों को हर साल इसका ऑडिट कर अनुपालन प्रमाणपत्र अपनी वेबसाइट/ऐप पर दिखाना होगा।
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पूरी जानकारी अनिवार्य: उत्पाद की एक्सपायरी डेट, वारंटी, रिटर्न और रिफंड की शर्तें, डिलीवरी समय और भुगतान से जुड़ी हर जरूरी जानकारी पहले ही देनी होगी।
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डेटा और आयात की जानकारी: बिना स्पष्ट सहमति के ग्राहकों के निजी डेटा का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, विदेशी सामानों पर आयातक का नाम और उत्पाद किस देश में बना है (मूल देश), यह बताना अनिवार्य होगा।



