नई दिल्ली: ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान उत्पादों पर मिलने वाली भारी छूट के असली सच से अब ग्राहक पूरी तरह वाकिफ हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए नियमों को सख्त करने का फैसला किया है। इसके तहत कीमतों में पारदर्शिता लाने, सर्च नतीजों में प्रायोजित उत्पादों की स्पष्ट पहचान करने और ग्राहकों को भ्रमित करने वाले डिजिटल तरीकों पर रोक लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
कीमतों में पारदर्शिता को लेकर सबसे बड़ा बदलाव छूट के दावों पर किया गया है। अब अगर कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किसी सामान पर डिस्काउंट दिखाता है, तो उसे नई कीमत के साथ-साथ उसकी पिछली वास्तविक कीमत भी दर्शानी होगी। यह पिछली कीमत छूट घोषित होने से पहले के 30 दिनों में रही सबसे कम कीमत मानी जाएगी। इस व्यवस्था के बाद कंपनियां पहले किसी उत्पाद के दाम कृत्रिम रूप से बढ़ाकर और फिर उस पर बड़ा डिस्काउंट दिखाकर ग्राहकों को लुभा नहीं सकेंगी।
सर्च नतीजों में होने वाले हेरफेर पर भी नकेल कसी जाएगी। ग्राहक जब किसी सामान को खोजेगा, तो कंपनियों को यह साफ-साफ बताना होगा कि सामने दिख रहा उत्पाद वास्तविक सर्च का नतीजा है या फिर पैसे देकर स्पॉन्सर किया गया है। कंपनियां सर्च रैंकिंग को इस तरह प्रभावित नहीं कर पाएंगी जिससे असली परिणाम नीचे दब जाएं। इसके अलावा ग्राहकों को उत्पाद की वापसी, वारंटी, डिलीवरी, भुगतान और उपयोग की तारीख जैसी आवश्यक जानकारियां पहले ही देनी होंगी। साथ ही उत्पाद के आयातक और उसके मूल देश (कंट्री ऑफ ओरिजिन) की जानकारी देना भी अनिवार्य रहेगा, और बिना पूर्व सहमति के ग्राहकों के डेटा का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
ग्राहकों को गुमराह कर जबरन खरीदारी या सब्सक्रिप्शन की ओर धकेलने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर भी कड़े अंकुश का प्रावधान किया गया है। चेकआउट के आखिरी चरण में अचानक अतिरिक्त शुल्क जोड़ना या जल्दबाजी का दबाव बनाने जैसे भ्रामक इंटरफेस पर पूरी रोक रहेगी। 2023 के डार्क पैटर्न दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को हर साल खुद का ऑडिट कराना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र (कंप्लायंस सर्टिफिकेट) सार्वजनिक तौर पर अपने प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित करना होगा।


