भीषण गर्मी की दस्तक और पारा चढ़ने के साथ ही छत्तीसगढ़ शासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। बढ़ते तापमान और लू (Heat Wave) के खतरों को देखते हुए प्रदेश भर में विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। जशपुर के प्रसिद्ध चिकित्सक और आईडीएसपी (IDSP) के नोडल अधिकारी डॉ. डी. के. अग्रवाल ने नागरिकों को आगाह किया है कि इस मौसम में छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए ‘सावधानी ही एकमात्र बचाव’ है।
डॉ. अग्रवाल की सलाह : लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि भीषण गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी सबसे बड़ा खतरा पैदा करती है। उन्होंने विशेष रूप से **’तापघात’ (Heat Stroke)** के संकेतों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि यदि किसी को सिर में भारीपन, तेज बुखार, चक्कर आना या उल्टी महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान न समझें। यह लू के सीधे लक्षण हैं। उन्होंने सलाह दी है कि प्यास न लगने पर भी थोड़े-थोड़े अंतराल में पानी, ओआरएस (ORS), छाछ और नींबू पानी का सेवन करते रहें। साथ ही, दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें और यदि निकलना अनिवार्य हो, तो सूती कपड़े पहनें और सिर को तौलिये या टोपी से जरूर ढंकें।
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भारत सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के बाद स्थानीय प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ‘वाटर एटीएम’ व प्याऊ केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग को स्कूलों के समय में परिवर्तन करने और परिसरों में ओआरएस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, श्रम विभाग को स्पष्ट किया गया है कि कार्यस्थलों पर शेड और ठंडे पानी की व्यवस्था हो तथा मजदूरों की कार्य-शिफ्ट बदली जाए ताकि उन्हें तीखी धूप में काम न करना पड़े।
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स्वास्थ्य विभाग की ‘रैपिड रिस्पांस टीम’ संभालेगी कमान
संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें ने प्रदेश के सभी सीएमएचओ (CMHO) को ग्रीष्म और वर्षा ऋतु की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। जिला और विकासखंड स्तर पर ‘रैपिड रिस्पांस टीम’ का गठन किया जाएगा, जो किसी भी संक्रामक बीमारी की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचेगी। पिछले वर्षों (2025-26) में प्रभावित रहे क्षेत्रों और पहुंचविहीन गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
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जल जनित बीमारियों पर वार: क्लोरिनेशन अनिवार्य
बीमारियों से बचाव के लिए पेयजल की शुद्धता को प्राथमिकता दी गई है। सभी नलकूपों और कुओं का अनिवार्य रूप से क्लोरिनेशन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं में सप्ताह में एक बार ब्लीचिंग पाउडर डालने और खराब हैंडपंपों को तत्काल ठीक कराने के लिए पीएचई (PHE) विभाग से समन्वय किया गया है।
अस्पतालों में दवाइयों का स्टॉक और आपातकालीन व्यवस्था
सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक औषधियों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित कर लिया गया है। मितानिनों के पास ओआरएस, पैरासिटामोल और क्लोरिन गोली की किट उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, सर्पदंश (Snake Bite) के मामलों के लिए ‘एंटी स्नेक वीनम’ और ‘एंटी रेबीज वैक्सीन’ का स्टॉक भी रखने के निर्देश दिए गए हैं। मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए नियमित सर्वे और कीटनाशकों का छिड़काव तेज कर दिया गया है।
आपातकालीन सलाह:
यदि कोई व्यक्ति लू से बेहोश हो जाए, तो उसे तुरंत छायादार जगह पर ले जाकर ठंडे पानी की पट्टी लगाएं और बिना देरी किए **108 या 104** हेल्पलाइन की मदद से अस्पताल पहुंचाएं।


