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बिलासपुर/रायपुर | 21 फरवरी 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा जगत में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदेश के सभी हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में कक्षा पांचवीं और आठवीं की वार्षिक परीक्षाएं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ही आयोजित की जाएंगी। कोर्ट ने प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने इन परीक्षाओं को स्वयं संचालित करने का अधिकार मांगा था।

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6200 स्कूलों पर सीधा असर

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल (सीजी बोर्ड) से मान्यता प्राप्त लगभग 6200 निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर लगाम लग गई है। अब इन स्कूलों में परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्न पत्र तैयार करने, मूल्यांकन और पूरी निगरानी की सीधी जिम्मेदारी शासन की होगी।

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फर्जी सीबीएसई स्कूलों का खुलेगा काला चिट्ठा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन फर्जी स्कूलों के लिए करारा झटका है जो बिना वैध मान्यता या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर खुद को सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध बताकर अभिभावकों को गुमराह कर रहे थे। अब सरकारी स्तर पर परीक्षा होने से ऐसे स्कूलों की असलियत सार्वजनिक हो जाएगी, क्योंकि उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड और शासन के नियमों के दायरे में आना होगा।

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मामले की सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने दलील दी थी कि निजी स्कूलों द्वारा स्वयं परीक्षा लेने से शैक्षणिक गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ समझौता हो रहा है। उन्होंने फर्जी स्कूलों के कारण हजारों बच्चों के भविष्य पर मंडरा रहे खतरे का मुद्दा उठाया था। कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए निजी प्रबंधन की मांग को सिरे से नकार दिया।

इस फैसले से न केवल प्रदेश की परीक्षा प्रणाली में एकरूपता आएगी, बल्कि शिक्षा के व्यवसायीकरण पर भी अंकुश लगेगा। अब स्कूल शिक्षा विभाग को जल्द ही इन परीक्षाओं के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।

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