नई दिल्ली:
भारतीय रेलवे को माल परिवहन का पसंदीदा माध्यम बनाने और देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करने के लिए रेलवे बोर्ड ने वैगन डिज़ाइन नीति में व्यापक सुधार करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद अगले पंद्रह दिनों के भीतर नई वैगन डिज़ाइन नीति जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस नई नीति के लागू होने से विभिन्न उद्योगों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार वैगनों का डिज़ाइन तैयार करने की बड़ी सुविधा प्राप्त होगी। बैठक में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना एवं रवनीत सिंह बिट्टू सहित अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के महानिदेशक और रेलवे बोर्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उद्योगों की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप होगा कस्टमाइजेशन
भारतीय रेलवे विभिन्न उद्योगों, व्यापारिक संगठनों तथा प्रमुख माल ग्राहकों के साथ विस्तृत परामर्श कर रही है। इस चर्चा के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया था कि यदि वैगनों के डिज़ाइन को विभिन्न वस्तुओं की विशिष्ट हैंडलिंग, लोडिंग और अनलोडिंग के अनुकूल बनाया जाए, तो रेल परिवहन को अधिक व्यापक रूप से अपनाया जा सकता है। सीमेंट और नमक जैसी वस्तुओं के लिए हाल ही में विकसित विशेषीकृत वैगनों की सफलता ने यह सिद्ध किया है कि उद्योगों की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइजेशन कितना महत्वपूर्ण है। नई नीति के तहत अब स्टील कॉइल्स जैसी भारी वस्तुओं के परिवहन हेतु विशेष बाइंडिंग व्यवस्था एवं समर्पित लोडिंग-अनलोडिंग प्रणालियों वाले वैगन उद्योग खुद डिज़ाइन कर सकेंगे। वैगनों की सुरक्षा और मानकों को सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी आरडीएसओ और सीसीआरएस की रहेगी, जिससे भारत में सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले वैगनों का निर्माण सुनिश्चित होगा।
हरित लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा और आयातित डीज़ल पर घटेगी निर्भरता
यह सुधार रेलवे माल परिवहन तंत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ सड़क से रेल की ओर अधिक मात्रा में माल स्थानांतरित करने में सक्षम बनाएगा। रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग नब्बे प्रतिशत अधिक पर्यावरण-अनुकूल है। भारतीय रेल के लगभग शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के निकट पहुँचने के साथ, रेल-आधारित माल परिवहन में वृद्धि से देश की आयातित डीज़ल पर निर्भरता काफी कम होगी। इसके परिणामस्वरूप कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, लॉजिस्टिक लागत घटेगी और देश के आम नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुएं अधिक किफायती और सुलभ बन सकेंगी। यह प्रस्तावित नीति विकसित भारत के विजन को साकार करने और पर्यावरणीय स्थिरता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक आधुनिक और ग्राहक-केंद्रित कदम है।


