Hydrogen Train India: भारतीय रेलवे ने हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली Hydrogen Train परियोजना शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन फ्यूल-सेल तकनीक पर आधारित ट्रेनें संचालित की जा रही हैं।
यह ट्रेन 17 जुलाई से जींद और सोनीपत के बीच नियमित सेवा शुरू करेगी। खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए न डीजल की जरूरत होगी और न ही ओवरहेड बिजली लाइन की।
क्या है भारत की पहली Hydrogen Train की खासियत?
यह ट्रेन 1200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल-सेल सिस्टम से संचालित होगी। इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किमी प्रति घंटा होगी और एक बार में 682 यात्री सफर कर सकेंगे।
- 1200kW हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रोपल्शन सिस्टम
- अधिकतम गति 75 किमी/घंटा
- 10 कोच वाली ट्रेन
- एक बार में 682 यात्रियों की क्षमता
- रोजाना लगभग 356 किलोमीटर का संचालन
- जींद–सोनीपत के बीच दो फेरे
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है?
सामान्य ट्रेनों के विपरीत Hydrogen Train में हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होती है। यही बिजली ट्रेन के मोटर को चलाती है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इंजन से धुआं नहीं निकलता। इसके बजाय केवल पानी की भाप उत्सर्जित होती है, जिससे प्रदूषण लगभग नहीं के बराबर रहता है।
हाइड्रोजन गैस कहां और कैसे भरी जाएगी?
भारतीय रेलवे ने जींद में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है। यहां पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है।
इसके बाद हाइड्रोजन को उच्च दबाव वाले टैंकों में स्टोर किया जाता है और विशेष फ्यूलिंग स्टेशन के जरिए ट्रेन में भरा जाता है। इसके लिए अलग रेलवे ट्रैक की जरूरत नहीं होती और ट्रेन सामान्य पटरियों पर ही चलती है।
किन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन?
यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।
- जींद सिटी
- पांडू पिंडारा
- ललित खेड़ा
- भांपेगा
- ईशापुर खेड़ी
- बुटाना
- खांडराई
- गोहाना
- राबड़ा
- लाठ
- मोहाना
- बरवासनी
भारत के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
भारत ने वर्ष 2022 में National Hydrogen Mission की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक हर साल 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। रेलवे की यह परियोजना उसी मिशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पहले इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 150 करोड़ रुपये थी, लेकिन मौजूदा डीजल ट्रेन में हाइड्रोजन तकनीक लगाने से इसे घटाकर 111.83 करोड़ रुपये कर दिया गया।
क्या बदल सकता है आने वाले समय में?
भारतीय रेलवे पहले ही “Hydrogen for Heritage” योजना के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनों की योजना बना चुका है। यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में बिना विद्युतीकरण वाले कई रेल मार्गों पर Hydrogen Train को उतारा जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

