“डिजिटल क्रांति से जागा ग्रामीण भारत: वर्चुअल सत्रों के जरिए पंचायत प्रतिनिधियों को मिला उपभोक्ता संरक्षण का प्रशिक्षण”

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

राजधानी के भारत मंडपम में आज एक नई सुबह का उदय हुआ, जहाँ तकनीक और इंसानियत का अनोखा संगम देखने को मिला। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की शुरुआत के साथ ही भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में पूरी दुनिया का मार्गदर्शक बन चुका है। ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला यह पहला ऐसा महाकुंभ है, जहाँ एआई का इस्तेमाल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि जन, पर्यावरण और प्रगति के लिए किया जा रहा है।

महुआ,सरई के फूल और आम के बौर की रसीली खुशबू से जंगल बना कुदरत का असली मयखाना!

खेतों तक पहुँची तकनीक की गूँज

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी गूँज ग्रामीण भारत में सुनाई दे रही है। भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया ‘भारत फोरकास्टिंग सिस्टम’ (BharatFS) अब देश की हर ग्राम पंचायत के लिए सुरक्षा कवच बन गया है। अब गाँव का किसान आसमान की ओर देखकर केवल उम्मीद नहीं करता, बल्कि अपनी हथेली पर मौजूद मोबाइल ऐप से यह जान लेता है कि अगले 10 दिनों में उसके 6 किलोमीटर के दायरे में कब बारिश होगी। ‘मौसम जीपीटी’ जैसे एआई चैटबॉट अब किसानों के नए सलाहकार बन चुके हैं, जो उन्हें बुवाई से लेकर कटाई तक की सटीक सलाह दे रहे हैं।

​”बेखुदी का वन-शॉट: कुदरती जाम में डूबी हवाएँ और दरख्तों का इश्किया मिजाज”

कुदरती आपदाओं पर एआई की लगाम

तकनीक का असली चमत्कार आपदा प्रबंधन में दिखाई दे रहा है। भारत ने समंदर की लहरों से लेकर पहाड़ों की ढलानों तक एआई का जाल बिछा दिया है। एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक की मदद से अब चक्रवात के आने से 96 घंटे पहले ही उसका सटीक रास्ता जान लिया जाता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ों में लगे सेंसर अब किसी भी भूस्खलन से तीन घंटे पहले ही खतरे की घंटी बजा देते हैं। यह 3 घंटे का समय हज़ारों जिंदगियां बचाने के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

‘PM राहत’ योजना को मंजूरी, सड़क दुर्घटना पीड़ितों का होगा मुफ्त इलाज

प्रकृति का डिजिटल रक्षक

सिर्फ इंसान ही नहीं, एआई अब हमारे जंगलों और बेजुबान जानवरों का भी रखवाला है। एआई कैमरों की पैनी नज़र अब जंगल की आग को भड़कने से पहले ही पकड़ लेती है। वहीं, आईआईटी खड़गपुर के वैज्ञानिकों ने एआई के जरिए गंगा के किनारों पर पानी में छिपे ‘आर्सेनिक’ जैसे धीमे ज़हर की पहचान कर ली है, जिससे ‘जल जीवन मिशन’ के तहत लाखों लोगों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है।

अब स्कूल और दफ्तरों में ‘रील्स’ बनाने वाले सरकारी कर्मचारियों की खैर नहीं , ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई

निष्कर्ष: विकसित भारत का डिजिटल रोडमैप

22 पेटाफ्लॉप्स की सुपरकंप्यूटिंग शक्ति और 2070 तक ‘नेट-जीरो’ उत्सर्जन का लक्ष्य—भारत आज एक ऐसी राह पर है जहाँ विकास और पर्यावरण साथ-साथ चलते हैं। यह शिखर सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भारत एआई के जरिए एक ऐसा भविष्य गढ़ रहा है जहाँ तकनीक समावेशी है, न्यायसंगत है और सबसे महत्वपूर्ण, मानवीय है।

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version