नई दिल्ली: अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से रहस्यों से भरी रही है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने अब सूर्य के उन रहस्यों से पर्दा उठाना शुरू कर दिया है, जो हमारी पृथ्वी पर संचार और बिजली प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट शोध संस्थान (ARIES) के शोधकर्ताओं ने आईआईटी दिल्ली और स्पेन के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर सूर्य की चुंबकीय शक्ति को मापने का एक नया और अनोखा तरीका खोज निकाला है।
क्या हैं ये ‘सौर तंतु’ और क्यों हैं जरूरी?
सूर्य के वायुमंडल में तैरते हुए ठंडे प्लाज्मा के विशाल बादलों को ‘सौर तंतु’ (Solar Filaments) कहा जाता है। ये बादल सूर्य के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों के सहारे टिके रहते हैं। जब ये तंतु अस्थिर होते हैं, तो सूर्य में बड़े विस्फोट होते हैं, जिसका असर पृथ्वी के सैटेलाइट्स, जीपीएस और पावर ग्रिड्स पर पड़ सकता है। इसीलिए, इनकी ताकत और बनावट को समझना वैज्ञानिकों के लिए बहुत जरूरी है।
सूर्य की ‘भूकंप विज्ञान’ तकनीक का कमाल
जैसे वैज्ञानिक पृथ्वी के भीतर की हलचल समझने के लिए भूकंप की लहरों का अध्ययन करते हैं, वैसे ही इस शोध में सूर्य की लहरों (दोलनों) का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि जब ये सौर तंतु एक साथ दो अलग-अलग दिशाओं में हिलते (दोलन करते) हैं, तो वे अपनी आंतरिक संरचना के बारे में गुप्त संकेत देते हैं।
क्या पता चला इस नई खोज से?
उन्नत सांख्यिकीय विधियों (बेयसियन विश्लेषण) का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने कुछ बड़ी बातें बताई हैं:सूर्य के ऊपर जो चुंबकीय नलिकाएं इन तंतुओं को थामे रखती हैं, वे 100 से 1000 मेगामीटर तक लंबी हो सकती हैं। इन चुंबकीय क्षेत्रों में घुमाव बहुत कम होता है, जिसका मतलब है कि ये फिलहाल काफी स्थिर स्थिति में हैं। अब वैज्ञानिक बिना वहां जाए यह बता सकते हैं कि सूर्य के उस हिस्से में चुंबकीय क्षेत्र कितना मजबूत है।
आम आदमी के लिए इसका क्या फायदा?
यह खोज केवल किताबी नहीं है। सूर्य में होने वाले विस्फोटों की सही भविष्यवाणी करने में यह तकनीक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगी। यदि हमें समय रहते पता चल जाए कि सूर्य से कोई बड़ा तूफान आने वाला है, तो हम अपने सैटेलाइट्स और संचार प्रणालियों को सुरक्षित कर सकेंगे, जिससे इंटरनेट और बिजली जैसी सेवाओं में आने वाली रुकावटों से बचा जा सकेगा।



