प्रयागराज: माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (UP Board) ने कक्षा 10वीं (हाईस्कूल) की परीक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। शासन के आदेश और बोर्ड की नई विज्ञप्ति के अनुसार, अब हाईस्कूल के विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों में स्कूल स्तर पर होने वाले आंतरिक मूल्यांकन की पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब इन दोनों प्रमुख विषयों में 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा सीधे उत्तर प्रदेश बोर्ड द्वारा अलग से आयोजित की जाएगी।
क्या थी पुरानी व्यवस्था और अब क्या बदला है?
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पुरानी व्यवस्था: अब तक हाईस्कूल के सभी विषयों में प्रयोगात्मक कार्यों और आंतरिक मूल्यांकन का जिम्मा स्कूल स्तर पर ही होता था। इसके लिए 5-प्वाइंट स्केल ग्रेडिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था और इसी आधार पर ग्रेड अंक-पत्र में दर्ज होते थे।
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नई संशोधित व्यवस्था: अब विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों के लिए यह नियम बदल गया है। इन दोनों विषयों में 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा बोर्ड के निर्देशानुसार होगी और केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन अब मान्य नहीं होगा। विद्यार्थियों को इन परीक्षाओं में मिले अंक उनके फाइनल मार्कशीट में स्पष्ट रूप से दर्शाए जाएंगे।
अन्य विषयों पर क्या असर पड़ेगा?
छात्रों और अभिभावकों के लिए यह जानना जरूरी है कि यह बदलाव केवल दो विषयों के लिए है:
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विज्ञान और गृह विज्ञान: बोर्ड की ओर से आयोजित 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा (अंकों का निर्धारण)।
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अन्य सभी विषय: शेष अन्य विषयों में पहले की तरह ही स्कूल स्तर पर 5-प्वाइंट स्केल ग्रेडिंग के आधार पर आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था यथावत जारी रहेगी, जिसके ग्रेड अंकपत्र में दर्ज किए जाएंगे।
अंकपत्र (मार्कशीट) में दिखेगा बदलाव
बोर्ड परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्रों को मिलने वाले अंक-पत्र सह प्रमाण-पत्र में विज्ञान और गृह विज्ञान के प्रयोगात्मक अंकों को विशेष तौर पर जोड़ा जाएगा, जबकि अन्य विषयों के लिए पारंपरिक ग्रेडिंग प्रणाली ही नजर आएगी। परिषद के विनियमों के अध्याय-13 के विनियम-3 में किए गए इस संशोधन से मूल्यांकन प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता आएगी।



