राजनांदगांव //-
प्रदेश के शिक्षक स्कूलों में पढ़ाई छोड़ आज एक बार फिर सड़को पर उतरे। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में प्रदेश के हजारों शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आंदोलन का आगाज किया।
यह धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन एक दिवसीय था। धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन को छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ सहित प्रदेश के लगभग 10 से अधिक शिक्षक एलबी संवर्ग संगठनों ने अपना खुला और नि: शर्त समर्थन दिया था
उक्त आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ पंजीयन क्रमांक 122202595034 के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने आज जिला मुख्यालय राजनांदगांव में मंच के माध्यम से प्रदेश के शिक्षकों की मांगों को लेकर खूब गरजे…. और राज्य सरकार पर जमकर बरसे।
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उन्होंने मंच के माध्यम से राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश के शिक्षकों से राज्य सरकार बातचीत करें और बातचीत कर समस्याओं के समाधान का रास्ता निकाले। जशपुर की आबोहवा में छिपा है छत्तीसगढ़ का नया ‘एग्रो-स्वर्ग’”, बस पहल की जरुरत
यह बात उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने विगत विधानसभा चुनाव 2018 के पहले अपने चुनावी घोषणा पत्र को मोदी की गारंटी नाम देते हुए प्रदेश के शिक्षकों से बहुत सारे वादे किए थे। उक्त वादों से राज्य में भाजपा को बड़ी जीत मिली। प्रदेश में भाजपा की सरकार बने लगभग दो साल पूरा भी हो गया। लेकिन आज तक न तो सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर हुई, ना तो क्रमोन्नति वेतनमान मिला और ना ही प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना की गई।
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बल्कि ऊपर से टेट की अनिवार्यता के नाम पर तथा (VSK) विद्या समीक्षा केंद्र में ऑनलाइन उपस्थिति के नाम पर शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
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इन्हीं सारे मुद्दों पर प्रदेश के शिक्षकों ने आज स्कूल छोड़ सड़कों पर उतरा और राज्य सरकार से साफ-साफ व स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार को प्रदेश के समस्त शिक्षक संगठनो की बैठक आयोजित कर समस्याओं को खुले मंच में सुननी चाहिए एवं यथा संभव समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
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प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने कहा कि विभिन्न कर्मचारीयो की मांगों को उठाने वाले प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी नेताओं को अधिकारियों द्वारा टारगेट किया जाता है। जो किसी भी सूरत में ठीक नहीं है।
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कर्मचारी नेताओं के द्वारा राज्य के विभिन्न कर्मचारियों की मांगों को समय समय पर सोशल मीडिया में उठाया जाता है, जिससे कुछ असामाजिक व शरारती तत्वों द्वारा कर्मचारी नेताओं की जानबूझकर आपसी दुश्मनी एवं रंजिशवस झूठी व मनगढ़ंत शिकायत की जाती है जिस पर जिले के अधिकारीयो द्वारा बगैर किसी जांच पड़ताल के उन्हें निलंबित कर परेशान किया जाता है। जो किसी भी सूरत में उचित नहीं है।
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वीएसके एप्प में ऑनलाइन अटेंडेंस करना मुश्किल है क्योंकि प्रदेश के बस्तर और सरगुजा संभागों सहित अधिकांश जिलों के दूरस्थ स्कूलों में मोबाइल का टावर एवं नेटवर्क साफ नहीं रहता जिससे ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं हो पाता है। निजी मोबाइल के उपयोग से डेटा लीक होने सहित बैंक अकाउंट से पैसा चोरी एवं फ्राड होने का खतरा बना हुआ है।
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संगठन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि प्रदेश के सहायक शिक्षक/नव पदोन्नत प्रधान पाठक/नवीन यूडीटी के वेतनमान में विसंगति है जिसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए। पूर्ववर्ती सरकार ने इसके लिए कमेटी बनाया था लेकिन आज तक कमेटी का रिजल्ट घोषित नहीं किया गया है। क्रमोन्नति वेतनमान देना होगा, प्रथम सेवा गणना का पुरानी पेंशन सहित समस्त लाभ देना होगा। मंच के माध्यम से प्रांताध्यक्ष जाकेश साहू ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आज का आंदोलन एक सांकेतिक तौर पे एक दिन का है। और यदि इसके बाद भी सरकार आंदोलन को गंभीरता से नहीं लेगी एवं शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं करेंगी तो आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठन मिलकर अनिश्चितकालीन एवं व्यापक/वृहत आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। उक्त धरना प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित रहे।
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