प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के दूसरे चरण यानी जेजेएम 2.0 को मंजूरी देते हुए इसकी अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार का मुख्य ध्यान अब केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सेवा वितरण और ग्रामीण पाइपलाइन के माध्यम से पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने की ओर केंद्रित होगा। इस पुनर्गठन के साथ ही योजना का कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 3.59 लाख करोड़ रुपये होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए “सुजलम भारत” नाम से एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट आईडी दी जाएगी। यह प्रणाली स्रोत से नल तक पूरी पेयजल आपूर्ति का डिजिटल मानचित्रण करेगी। इसके साथ ही “जल अर्पण” के माध्यम से योजनाओं के संचालन में ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अब कोई भी गांव खुद को ‘हर घर जल’ तभी घोषित कर सकेगा, जब वहां संचालन और रखरखाव के पुख्ता इंतजाम होने की पुष्टि हो जाएगी। सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए “जल उत्सव” जैसे वार्षिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि ग्रामीण स्वयं पानी के स्रोतों की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी उठा सकें।
जल जीवन मिशन के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2019 में जहां केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल कनेक्शन थे, वहीं अब यह आंकड़ा 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और एसबीआई रिसर्च जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन ने 9 करोड़ महिलाओं को पानी ढोने के श्रम से मुक्त किया है और डायरिया जैसी बीमारियों से होने वाली लाखों मौतों को रोकने में मदद की है। जेजेएम 2.0 का लक्ष्य विकसित भारत @2047 के विजन को ध्यान में रखते हुए 24×7 सुनिश्चित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे न केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
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