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राँची
खूंटी जिले में पड़हा राजा सोम मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। इसी क्रम में राँची के अल्बर्ट एक्का चौक पर मंगलवार शाम आदिवासी संगठनों द्वारा मशाल जुलूस निकालकर आक्रोश का प्रदर्शन किया गया और 17 जनवरी को झारखण्ड बंद का ऐलान किया गया।
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मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मशालें लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के पारंपरिक नेतृत्व और सामाजिक व्यवस्था को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। संगठनों ने कहा कि पड़हा राजा सोम मुंडा की हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर सीधा हमला है।
आदिवासी संगठनों के नेताओं ने कहा कि सोम मुंडा समाज में सम्मानित पदहा राजा थे और उनकी हत्या से पूरे आदिवासी समाज में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक इस मामले में न तो असली आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जब तक हत्याकांड के सभी दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आदिवासी समाज की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
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आदिवासी संगठनों ने 17 जनवरी को झारखण्ड बंद का आह्वान करते हुए राज्य के सभी जिलों में सड़क जाम और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा की है। बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर व्यापारिक प्रतिष्ठान शैक्षणिक संस्थान और परिवहन व्यवस्था प्रभावित रहने की संभावना जताई गई है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह बंद केवल विरोध नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता न्याय और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इस बंद का समर्थन कर आदिवासी समाज को न्याय दिलाने में सहयोग करें।
घटना को लेकर राँची पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। अल्बर्ट एक्का चौक सहित शहर के प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
आदिवासी संगठनों का कहना है कि सोम मुंडा की हत्या ने राज्य में आदिवासी सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और इसका जवाब सरकार को देना ही होगा।
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