रायपुर: छत्तीसगढ़ में शहरी विकास योजनाओं को अब फाइलों से निकालकर सीधे जमीनी हकीकत का रूप दिया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य के सभी 194 नगरीय निकायों में एक साथ समीक्षा का बिगुल फूंक दिया है। 6 जून 2026 को सभी नोडल अधिकारी अपने-अपने आवंटित जिलों में पहुंचकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और योजनाओं की वास्तविक स्थिति की परख करेंगे।
समीक्षा बैठक में सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने सख्त तेवर अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के लिए सितंबर 2026 ही अंतिम समय-सीमा है। इसके बाद न तो कोई समयवृद्धि दी जाएगी और न ही शासन की ओर से कोई अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। यदि परियोजनाएं अधूरी रहती हैं, तो इसका वित्तीय भार संबंधित नगरीय निकाय को ही उठाना होगा।सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अब बहाने नहीं, परिणाम चाहिए।
विभाग ने अब रिजल्ट-ओरिएंटेड कार्यसंस्कृति पर जोर दिया है। धीमी गति से काम करने वाले निकायों और ठेकेदारों को चेतावनी दी गई है कि यदि सुधार नहीं हुआ, तो सीधे कार्रवाई की जाएगी। बैठक में केवल प्रधानमंत्री आवास ही नहीं, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन और मुख्यमंत्री नगरोत्थान जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के हर पहलू, जैसे भूमि उपलब्धता से लेकर निर्माण की गुणवत्ता तक, पर बारीकी से चर्चा हुई।
योजनाओं की सफलता के लिए अब विभाग वॉर्ड लेवल मॉनिटरिंग का मॉडल अपना रहा है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी केवल दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट नहीं लेंगे, बल्कि खुद फील्ड पर जाकर काम देखेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की भौतिक जांच, मैदानी स्तर पर आ रही बाधाओं का मौके पर ही निपटारा और जिला प्रशासन व नगरीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि केवल संरचनाएं खड़ी न हों, बल्कि उनका लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे। सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जलापूर्ति, स्वच्छता और बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। रायपुर से जारी ये निर्देश स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले दिनों में शहरी विकास के मोर्चे पर अधिकारी और ठेकेदारों के लिए ढीलेपन की कोई जगह नहीं है।

