झारखंड में खनिज संसाधनों की खोज और उनके वैज्ञानिक दोहन को लेकर राज्य सरकार एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रही है। राज्य में जल्द ही स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (एसएमईटी) का गठन किया जाएगा, जो नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की तर्ज पर काम करेगा। इस ट्रस्ट का उद्देश्य राज्य में मौजूद खनिज संपदा की पहचान, खोज और विकास को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाना है, ताकि झारखंड खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके और आर्थिक विकास को गति मिल सके।
End Of Year 2025 निवेश कल्याण और प्रशासनिक सुधार से छत्तीसगढ़ ने रचा नया विकास मॉडल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, एसएमईटी को एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में गठित किया जाएगा। इसके माध्यम से खनिजों की क्षेत्रीय और विस्तृत खोज की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा तय की गई नीति के तहत खनिज अन्वेषण के लिए एक अलग कोष तैयार किया जाएगा, जिसमें खनन पट्टा या अन्वेषण लाइसेंस धारकों से एमएमडीआर अधिनियम की दूसरी अनुसूची के अनुसार रॉयल्टी का एक से दो प्रतिशत हिस्सा लिया जाएगा। इसी राशि से खनिजों की खोज, सर्वेक्षण और शोध कार्य कराए जाएंगे।
एसएमईटी की संरचना भी तय की जा रही है। इसके अध्यक्ष राज्य के खान मंत्री होंगे, जबकि खान सचिव, खान निदेशक, भू-तत्व निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी इसके सदस्य होंगे। ट्रस्ट के माध्यम से गहरे और अब तक अज्ञात खनिज भंडारों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही खनिज क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन, माइंस प्लान तैयार करना, उन्नत तकनीक से अन्वेषण और धातु विज्ञान से जुड़े शोध कार्य भी किए जाएंगे। सरकार का फोकस सतत खनन को बढ़ावा देने और खनिज संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर रहेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 30 दिसंबर तक तीन राज्यों के दौरे पर
जानकारी के अनुसार, खनिज अन्वेषण को लेकर झारखंड सरकार गंभीर है और इसी कड़ी में केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव को प्रमुखता से उठाया गया था। केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से एसएमईटी के शीघ्र गठन का आग्रह किया है और इसे क्रिटिकल मिनरल्स की खोज के लिए बेहद जरूरी बताया है। केंद्र सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में लिथियम, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिज देश की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों के लिए अहम साबित होंगे, जिनमें झारखंड की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
Year Ender 2025: जब कुदरत बनी काल, प्राकृतिक आपदाओं ने दुनिया को झकझोर दिया
राज्य सरकार का मानना है कि एसएमईटी के गठन से न सिर्फ खनिज संसाधनों की बेहतर पहचान हो सकेगी, बल्कि अवैध खनन पर भी रोक लगेगी। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल झारखंड को खनिज आधारित विकास की नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
Year Ender 2025: जब कुदरत बनी काल, प्राकृतिक आपदाओं ने दुनिया को झकझोर दिया

