नई दिल्ली:
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगस्त महीने के लिए अपना ताजा मासिक और मौसमी पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार, अगस्त में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह प्रशांत महासागर में बन रहा मध्यम स्तर का ‘अल नीनो’ प्रभाव है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को कमजोर कर सकता है।
अगस्त में बारिश का गणित
अगस्त 2026 में देशभर में औसत बारिश ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) के 94% से कम रहने की उम्मीद है। 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर अगस्त के लिए सामान्य बारिश का मानक 254.9 मिमी माना जाता है। इससे पहले जुलाई महीने में कई कम दबाव के क्षेत्र बनने के कारण लगभग सामान्य बारिश दर्ज की गई थी, जिसने अल-नीनो के शुरुआती असर को बेअसर कर दिया था।
कहाँ होगी बारिश और कहाँ रहेगा सूखा?
देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है।
‘अल नीनो’ का खतरा और लंबे समय तक असर
मौसम विभाग के मुताबिक, वर्तमान में जारी ‘अल नीनो’ अगस्त में मध्यम तीव्रता में रहेगा और सितंबर तक इसके और तेज होने की संभावना है। ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में यह गर्म स्थिति 2027 की शुरुआत तक बनी रह सकती है।
राहत की किरण: ‘पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल’
जहाँ एक तरफ ‘अल नीनो’ चिंता बढ़ा रहा है, वहीं हिंद महासागर से एक सकारात्मक संकेत भी मिला है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सितंबर तक ‘पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल’ बनने के आसार हैं। यह एक ऐसी मौसमी स्थिति है जो भारत में मॉनसून को मजबूत करती है और अल-नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है।

