नई दिल्ली:
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के शुरुआती हफ्तों में देश के कई हिस्सों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम दर्ज किया गया है। IMD द्वारा ‘दीर्घावधि औसत’ (LPA) के आधार पर की जा रही दैनिक, साप्ताहिक और मौसमी मॉनिटरिंग के मुताबिक, 14 जुलाई 2026 तक देश भर में औसतन 21% कम बारिश हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसून में प्राकृतिक रूप से होने वाले बदलावों के कारण विभिन्न मौसम संबंधी उप-क्षेत्रों (Sub-divisions) में वर्षा का वितरण असमान रहा है। हालांकि कई इलाकों में वर्षा कम हुई है, लेकिन कुछ राज्यों और क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा भी दर्ज की गई है।
खाद्यान्न उत्पादन पर फिलहाल असर नहीं
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि खेती, जल संसाधनों, पेयजल और भूजल स्तर पर बारिश के प्रभाव का लगातार आकलन संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। फिलहाल देशव्यापी स्तर पर अनाज उत्पादन पर किसी बड़े प्रतिकूल प्रभाव के संकेत नहीं हैं।
बारिश की स्थिति: 14 जुलाई 2026 तक देश में 21% की गिरावट।
फसलों पर प्रभाव: खाद्यान्न उत्पादन पर फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं।
प्रशासनिक तंत्र: सूखा या बाढ़ की आधिकारिक घोषणा राज्य सरकारें, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और गृह मंत्रालय मिलकर करते हैं।
पूर्वानुमान क्षमता बढ़ाएगा ‘मिशन मौसम’
बारिश के स्थानिक (Spatial) और सामयिक (Temporal) उतार-चढ़ाव पर IMD लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर अलर्ट और पूर्वानुमान जारी किए जा सकें।
मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने के लिए सरकार पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम ‘मिशन मौसम’ पर तेजी से काम कर रही है। इस मिशन के तहत:
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मौसम संबंधी डेटा एकत्र करने की तकनीक और उपकरणों को उन्नत किया जा रहा है।
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वायुमंडलीय और भौतिक प्रक्रियाओं की वैज्ञानिक समझ को गहरा किया जा रहा है।
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उन्नत न्यूमेरिकल मॉडल (Advanced Numerical Models) विकसित किए जा रहे हैं ताकि मौसम की सटीक और समयबद्ध जानकारी दी जा सके।


