“जैव विविधता नियमों में बड़ा बदलाव: औषधीय पौधों के लिए लॉन्च हुआ नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, ABS प्रक्रिया हुई पेपरलेस” छत्तीसगढ़ : बदलते दौर में लोग अब सेहत की ओर लौट रहे हैं, यही वजह है कि ट्राइबल क्षेत्रों का ‘देशी मुनगा’ (सहजन) अब केवल गाँव की थाली तक सीमित नहीं रहा। आज बाजारों में हाइब्रिड … Continue reading न मलाई, न पनीर, कुदरत का ‘सुपरफूड’:देशी तड़का, सूप और सुकटी में छिपा है सेहत का खजाना।” आखिर क्यों दीवाने हैं इसके लिए शहर और गाँव ?
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