नेपाल सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरे दक्षिण एशिया में चर्चा छेड़ दी है। फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नेपाल में पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह कदम समाज में फैल रहे फेक न्यूज, अफवाहें, साइबर अपराध और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए उठाया गया है। इस फैसले के बाद करोड़ों यूजर्स दुविधा में हैं कि अब ऑनलाइन कनेक्शन और संवाद कैसे होंगे। आइए जानते हैं आखिर क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला और इससे नेपाल के लोगों पर क्या असर पड़ेगा।
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सोशल मीडिया पर नेपाल का सख्त कदम
नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया ऐप्स और प्लेटफॉर्म को बैन करने का आदेश जारी कर दिया है। इनमें फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टेलीग्राम जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए झूठी खबरें, हिंसा भड़काने वाले मैसेज और समाज विरोधी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही थीं।
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क्यों लगाया गया बैन?
सरकार का तर्क है कि पिछले कुछ महीनों में देश में फेक न्यूज और अफवाहों के कारण सामाजिक तनाव बढ़ा है। साथ ही साइबर क्राइम के केस भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुके हैं। कई बार सरकार ने इन कंपनियों को नोटिस देकर लोकल कानून का पालन करने को कहा, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते नेपाल सरकार ने कठोर कार्रवाई करते हुए बैन का ऐलान कर दिया।
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यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
नेपाल के करोड़ों लोग रोज़मर्रा की जिंदगी में सोशल मीडिया पर निर्भर थे। चाहे बिजनेस हो, पढ़ाई हो या परिवार और दोस्तों से जुड़ना – फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म अहम भूमिका निभाते थे। बैन के बाद लोग वैकल्पिक लोकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और VPN का सहारा ले सकते हैं। लेकिन सरकार का कहना है कि VPN के इस्तेमाल पर भी निगरानी रखी जाएगी।
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भविष्य क्या कहता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नेपाल सरकार लंबे समय तक इस बैन पर अड़ी रहती है तो डिजिटल इकोनॉमी को नुकसान हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे देश की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए सही कदम मान रहे हैं। सवाल यह है कि क्या नेपाल डिजिटल स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन बना पाएगा?
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पर्यटन पर असर
नेपाल सरकार के इस फैसले का असर पर्यटन पर भी पड़ सकता है। हर साल लाखों विदेशी सैलानी नेपाल आते हैं और ज्यादातर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके ही घरवालों से जुड़े रहते हैं। अब फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म बंद होने से टूरिस्ट को कम्युनिकेशन में दिक्कत होगी। रियल टाइम फोटो और वीडियो शेयर करना भी मुश्किल हो जाएगा।
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टूरिस्ट होटल, टैक्सी या गाइड की जानकारी अक्सर सोशल मीडिया ग्रुप्स से लेते हैं। बैन के बाद उन्हें लोकल वेबसाइट्स और ऐप्स पर निर्भर रहना पड़ेगा। कई पर्यटक VPN का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन इससे नेट की स्पीड और सिक्योरिटी पर असर पड़ सकता है। अगर बैन लंबा चला तो नेपाल की टूरिज्म इंडस्ट्री को नुकसान हो सकता है। क्या आप इस फैसले से सहमत हैं? नीचे कमेंट करें और इस खबर को शेयर करें।
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