रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले (कचरा सेठ) संस्थानों की मनमानी नहीं चलेगी। राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत 1 जुलाई 2026 से राज्य के सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों (बड़े कचरा उत्पादकों) का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय-सीमा के भीतर बिना पंजीयन पाए जाने वाले संस्थानों के खिलाफ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत कठोर कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कौन हैं सरकारी भाषा के ये ‘कचरा सेठ’?

आम बोलचाल में जिन्हें ‘कचरा सेठ’ कहा जा रहा है, उन्हें सरकारी और तकनीकी भाषा में बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) कहा जाता है। इस श्रेणी में वे सभी निजी और सरकारी प्रतिष्ठान शामिल हैं जो रोजाना भारी मात्रा में ठोस कचरा पैदा करते हैं:

  • व्यावसायिक केंद्र: बड़े होटल, मॉल, मल्टीप्लेक्स और मैरिज हॉल (विवाह भवन)।

  • संस्थान: निजी व सरकारी अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और बड़े कार्यालय।

  • सार्वजनिक स्थल: रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बड़ी आवासीय सोसायटियां।

सरकार का मानना है कि शहरों के कुल ठोस कचरे का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं बड़े संस्थानों से निकलता है। इसलिए अब ये संस्थान सिर्फ कचरा पैदा करके नगर निगम के भरोसे नहीं छोड़ सकते; इन्हें कचरे के वैज्ञानिक निपटान (Scientific Disposal) की जवाबदेही भी खुद उठानी होगी।

डिजिटल रडार पर रहेंगे बड़े कचरा उत्पादक

इस नई व्यवस्था के बाद छत्तीसगढ़ में पहली बार कचरा प्रबंधन को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है:

  • केंद्रीकृत रिकॉर्ड: सभी नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र के ‘कचरा सेठों’ का पंजीयन पोर्टल पर कराना होगा।

  • डिजिटल रसीद: पंजीयन के बाद मिलने वाली डिजिटल रसीद के आधार पर हर निकाय को अपना एक अद्यतन (Updated) डेटाबेस तैयार करना होगा।

  • कड़ी निगरानी: इस डेटाबेस के जरिए भविष्य में यह ट्रैक किया जाएगा कि कौन सा संस्थान नियमों का पालन कर रहा है और कौन नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्र के नए नियम-2026 का असर

यह पूरी सख्ती केंद्र सरकार के नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 और सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के कड़े निर्देशों के पालन के तहत की जा रही है। अदालत ने साफ कहा था कि सभी राज्य कचरा प्रबंधन नियमों को कड़ाई से लागू करें। इसी कड़ी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1 जून को ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की थी, जिसे अब छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 जुलाई से पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है।

नगर निकायों की भी बढ़ेगी जवाबदेही

नए आदेश का दारोमदार केवल होटलों या अस्पतालों पर ही नहीं, बल्कि खुद नगर निगमों और पालिकाओं पर भी होगा। स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके इलाके का एक भी बल्क वेस्ट जनरेटर बिना रजिस्ट्रेशन के न छूटे। यदि इसमें कोई लापरवाही पाई जाती है या नियम टूटते हैं, तो जवाबदेही निगरानी करने वाले अधिकारियों की भी तय होगी।

पर्यावरणविदों और जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से शहरों में साफ-सफाई की तस्वीर बदलेगी। अब कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी सिर्फ सफाई कर्मचारियों या नगर निकायों की नहीं होगी, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले को खुद सुधार करना होगा। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य को स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है।

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