रायपुर: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6, 2023-24) की फैक्ट शीट के ताजा आंकड़ों ने छत्तीसगढ़ में गैर-संचारी और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के तेजी से बढ़ते प्रकोप पर मुहर लगा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में डायबिटीज (शुगर) के मरीजों का कुल आंकड़ा पिछले सर्वे के 10.8 फीसदी से लगभग दोगुना उछलकर सीधे 20.9 फीसदी पर पहुंच गया है। विशेष रूप से शहरी इलाकों में रहने वाले पुरुषों में यह स्थिति सबसे गंभीर देखी गई है, जहां 26.5 फीसदी पुरुष डायबिटीज से पीड़ित पाए गए हैं।
शुगर के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) भी राज्य की एक बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 20.8 फीसदी पुरुष और 18.4 फीसदी महिलाएं उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे हैं। यह बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक संक्रामक बीमारियों के दौर से आगे निकलकर गंभीर गैर-संचारी रोगों (NCDs) के दौर में प्रवेश कर चुका है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ते संकट की मुख्य जड़ अनियंत्रित खान-पान, घटती शारीरिक सक्रियता और बढ़ता मोटापा है। रिपोर्ट में सामने आया है कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में 36.1 फीसदी महिलाएं और 21.1 फीसदी पुरुष मोटापे व ओवरवेट की श्रेणी में आ चुके हैं। वजन का अनियंत्रित बढ़ना सीधे तौर पर डायबिटीज और हृदय रोग जैसी घातक बीमारियों को न्योता दे रहा है, जो स्वास्थ्य विभाग और आम जनता दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।



