NMC की नई PwBD गाइडलाइन लागू MBBS दाखिले के लिए 61 केंद्रों पर होगा मूल्यांकन
नई दिल्ली
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग NMC ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम 2026 में दाखिले के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों PwBD के लिए नए और पारदर्शी दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। 27 जुलाई से प्रभावी हुए इन नियमों का उद्देश्य देशभर के दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा में निष्पक्ष और योग्यता आधारित माहौल सुनिश्चित करना है।
एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि केवल दिव्यांगता किसी अभ्यर्थी के डॉक्टर बनने की राह में रोड़ा नहीं बनेगी। किसी भी छात्र को महज उसकी शारीरिक अक्षमता के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा बल्कि उसकी कार्यात्मक क्षमता और आवश्यक सहयोग के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
मुख्य बदलाव और नई व्यवस्थाएं
दिव्यांग अभ्यर्थियों का वैज्ञानिक और निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए असेसमेंट सेंटर्स की संख्या 16 से बढ़ाकर 61 कर दी गई है।
PwBD आरक्षण का लाभ उठाने के लिए अभ्यर्थियों के पास वैध यूडीआईडी कार्ड स्वयं प्रमाणित शपथपत्र और मेडिकल असेसमेंट बोर्ड का पात्रता प्रमाणपत्र होना आवश्यक है। केवल यूडीआईडी कार्ड के आधार पर प्रवेश नहीं मिलेगा।
एनएमसी का कहना है कि दिव्यांग छात्रों को समान अवसर और सम्मान देने के साथ साथ मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल शिक्षा के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मेडिकल असेसमेंट बोर्ड के तीन संभावित फैसले
उम्मीदवार की क्षमताओं और पुनर्वास तकनीकों के मूल्यांकन के बाद बोर्ड तीन श्रेणियों में से एक रिपोर्ट जारी करेगा।
पहला पात्र।
दूसरा आवश्यक सुविधाओं के साथ पात्र।
तीसरा अपात्र। यदि अभ्यर्थी को अपात्र घोषित किया जाता है तो बोर्ड को इसका स्पष्ट लिखित कारण देना होगा।
अपील का अधिकार और कॉलेजों की जवाबदेही
यदि कोई अभ्यर्थी बोर्ड के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो वह स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा गठित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकता है। पुनर्मूल्यांकन के बाद अपीलीय प्राधिकरण का निर्णय अंतिम होगा।
सभी मेडिकल कॉलेजों को अपने कैंपस को दिव्यांग अनुकूल बनाना होगा। साथ ही छात्रों की सहायता और शिकायतों के निवारण के लिए एक नोडल अधिकारी और विशेष सेल का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
एनएमसी के अनुसार एमबीबीएस प्रवेश से संबंधित PwBD के सभी पुराने नियम अब समाप्त होकर इन नए दिशानिर्देशों से प्रतिस्थापित हो गए हैं।


