केंद्र की बड़ी राहत: पेट्रोल, डीजल और ATF पर विंडफॉल टैक्स में कटौती, 16 सितंबर से लागू हुईं नई दरें
नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के यूपीआई (UPI) भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले का विरोध सड़कों और बाजारों तक पहुंच गया है। दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में दुकानदारों ने यूपीआई से बड़े भुगतान लेने से इनकार करना शुरू कर दिया है। पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, लक्ष्मी नगर और कृष्णा नगर जैसे व्यस्त बाजारों में कई दुकानों के बाहर केवल नकद भुगतान (Cash Only) स्वीकार करने के पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं।
कारोबारियों का कहना है कि खुदरा व्यापार में मुनाफे का मार्जिन पहले से ही बेहद सीमित है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत लादने से उन पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा।
नकद लेन-देन की ओर लौटने की आशंका
किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और जनरल स्टोर के व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई ने लेन-देन को बेहद सुगम बना दिया था और ग्राहकों की जेब से नकदी का चलन लगभग खत्म हो रहा था। लेकिन ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था लागू होने से डिजिटल इंडिया की मुहिम को झटका लग सकता है और कारोबारी दोबारा नकद लेन-देन को प्राथमिकता देने पर मजबूर हो रहे हैं।
फैसले पर क्या बोले प्रमुख व्यापारिक संगठन?
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बृजेश गोयल (चेयरमैन, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री – CTI): “यूपीआई भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगना चाहिए। यदि सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बनाए रखना चाहती है, तो बैंकों और पेमेंट गेटवे की लागत का समाधान सरकारी इंसेंटिव के जरिए सीधे किया जाना चाहिए।”
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परमजीत सिंह पम्मा (अध्यक्ष, सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन): “छोटे और मध्यम खुदरा व्यापारियों का मार्जिन पहले ही बहुत कम है। बड़े भुगतान पर यह अतिरिक्त चार्ज लगने से व्यापार के शुद्ध मुनाफे में सीधी सेंध लगेगी।”
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योगेश सिंघल (अध्यक्ष, ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन): “हमने ग्राहकों की सहूलियत के लिए दुकानों में क्यूआर कोड लगाए थे। अगर बड़े भुगतानों पर शुल्क वसूला जाएगा, तो सर्राफा और बड़े खुदरा बाजार में ग्राहक व दुकानदार दोनों फिर से नकदी की ओर लौटने को विवश होंगे।”
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राकेश कुमार यादव (अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन): “भुगतान व्यवस्था की लागत कारोबारी खर्च का ही हिस्सा बनती है। यदि सरकार ने शून्य-शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं किया, तो लंबे समय में इस अतिरिक्त लागत का सीधा असर उत्पादों की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी।” IGNOU एडमिशन 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक बढ़ी, ऐसे करें अप्लाई



