“इतिहास बोलेगा, भविष्य देखेगा! भारत मंडपम में एआई का धमाका: न्यूज़ रूम से इंसान गायब, रोबोट सुनाएंगे खबरें और आप संभालेंगे ‘निर्देशक की कुर्सी’!”

नई दिल्ली | 16 फरवरी, 2026

राजधानी के भारत मंडपम में आज तकनीक और भविष्य का एक ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने दुनिया को चौंका दिया है। जहाँ एक ओर स्टार्टअप्स ने न्यूज़ रूम से इंसानों की छुट्टी कर रोबोटिक एंकर्स को उतारा है, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने शिक्षा की दुनिया में एक नए युग का शंखनाद कर दिया है। India AI Impact Summit 2026 के मंच से शिक्षा मंत्रालय अब “Pushing the Frontier of AI in India” नाम से एक विशेष सत्र के जरिए देश के क्लासरूम्स की सूरत बदलने जा रहा है।

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NEP 2020 और ‘विकसित भारत’ का डिजिटल रोडमैप

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी की उपस्थिति में आयोजित होने वाला यह सत्र केवल चर्चा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस सपने को हकीकत में बदलने की कोशिश है, जहाँ एआई (AI) शिक्षा के पारिस्थितिकी तंत्र का आधार होगा। मंत्रालय का लक्ष्य शिक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे निकलकर पूरे देश में एक स्थायी डिजिटल क्रांति लाना है।

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IIT मद्रास में बनेगा ‘AI for Education’ का नया केंद्र

बजट 2025-26 की बड़ी घोषणा के बाद, सरकार ने IIT मद्रास में “AI for Education” के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की स्थापना कर दी है। यह केंद्र स्वदेशी एआई नवाचारों और Frontier AI मॉडल्स के जिम्मेदार उपयोग पर काम करेगा। दीक्षा (DIKSHA) और स्वयं (SWAYAM) जैसे प्लेटफार्मों की सफलता के बाद, अब फोकस शिक्षकों के प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम में एआई के गहरे एकीकरण पर है।

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दिग्गजों का जमघट: ज़ोहो से लेकर IIT के निदेशक तक

इस विशेष सत्र में भारत के सबसे बड़े तकनीकी दिमाग एक साथ बैठेंगे। पैनल में ज़ोहो (Zoho) के संस्थापक डॉ. श्रीधर वेम्बू, पीक XV पार्टनर्स के राजन अनंदन, और IIT कानपुर, मद्रास व बॉम्बे के निदेशक शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य केंद्र यह है कि कैसे सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से भारत को एआई आधारित शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाया जाए।

क्या बदलेगा क्लासरूम में?

भारतीय भाषाओं और संस्कृति के अनुरूप एआई मॉडल्स का विकास। शिक्षकों को एआई टूल्स से लैस करना ताकि वे छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन दे सकें। जैसे न्यूज़ रूम में ‘ज़ीरो-टच’ तकनीक आई है, वैसे ही शिक्षा में भी ऑटोमेटेड और रिस्पॉन्सिव लर्निंग सिस्टम का विकास।

भारत मंडपम में 51 स्टार्टअप्स का नवाचार और शिक्षा मंत्रालय का यह विजन स्पष्ट संदेश दे रहा है—भारत में अब एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि ‘इतिहास बोलेगा और भविष्य देखेगा’ के नारे को सच करने वाली एक नई चेतना है। चाहे वह मनोरंजन हो या शिक्षा, ‘विकसित भारत 2047’ की नींव अब एआई के मज़बूत कंधों पर रखी जा रही है।

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