महिला नेतृत्व का सशक्तिकरण: 1 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित होगा ‘सशक्त पंचायत-नेत्री’ राष्ट्रीय सम्मेलन
देश भर की ग्राम पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और विकास की गति को तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई और प्रभावी पहल शुरू की है। पंचायती राज मंत्रालय ने ‘पंचायत विकास सूचकांक’ (PAI) के माध्यम से पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया को लागू किया है, ताकि प्रत्येक पंचायत के कार्यों का सटीक आकलन हो सके। इसके तहत 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को 9 विषयों में समेकित किया गया है, जिसके आधार पर ग्राम पंचायतों के कामकाज को मापा जाता है। इस सूचकांक के माध्यम से पंचायत स्तर पर प्रदर्शन की कमियों और मजबूत पक्षों की पहचान की जा रही है, जिससे विकास के उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सके जहां काम करने की अधिक आवश्यकता है।
इस मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायतों को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें ‘अचिवर’ (क+), ‘फ्रन्ट रनर’ (क), ‘परफ़ॉर्मर’ (ख), ‘ऐस्पीरन्ट’ (ग) और ‘बीगिनर’ (घ) शामिल हैं। यह वर्गीकरण साक्ष्य-आधारित है, जो पंचायतों को उनके स्कोर के आधार पर एक स्थान प्रदान करता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पंचायतों के बीच परस्पर शिक्षण और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना है, ताकि एक पंचायत द्वारा किए गए अच्छे कार्यों को दूसरी पंचायतें भी अपने यहां अपना सकें।
पोषण और स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ‘सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के डेटा के आधार पर देश भर की 1,000 शीर्ष उच्च-निष्पादन वाली ग्राम पंचायतों की पहचान की गई है। इन पंचायतों को न केवल प्रोत्साहित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें विशेष प्रोत्साहन अनुदान भी दिया जा रहा है। इस अनुदान राशि का 25% हिस्सा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के लिए, 25% सामुदायिक जागरूकता व लाभार्थी नामांकन के लिए और 50% पोषण-केंद्रित आंगनवाड़ी गतिविधियों जैसे पोषण वाटिका और पूरक पोषण को मजबूत करने के लिए आवंटित किया जा रहा है।
यह मूल्यांकन फ्रेमवर्क पूरी तरह से डेटा-संचालित और परिणाम-उन्मुख है, जो गंभीर तीव्र कुपोषण, बौनापन, कम वजन, मातृ पोषण और आंगनवाड़ी केंद्रों की बुनियादी अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों पर सुधार को मापता है। इन पहलों के माध्यम से न केवल पंचायतों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, बल्कि विकास के कार्यों में जवाबदेही और गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो रही है। केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए इन तथ्यों की जानकारी दी, जो यह स्पष्ट करता है कि सरकार जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कितनी गंभीर है।

