कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आज से छठ पूजा 2025 का शुभारंभ हो गया है। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व सूर्य देवता और छठी माता की आराधना का प्रतीक है। आज ‘नहाय-खाय’ के साथ इसकी पवित्र शुरुआत हुई है। यह पर्व न केवल सूर्य उपासना का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति, शुद्धता और आभार का संदेश भी देता है। छठ पूजा की शुरुआत से ही वातावरण भक्ति, सात्विकता और पवित्रता से भर जाता है।

नहाय-खाय का महत्व और परंपरा

छठ पूजा के पहले दिन को “नहाय-खाय” कहा जाता है, जो व्रती के शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण का प्रतीक है। इस दिन की खास बातें

  • व्रती सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी (गंगा, घाघरा या गोमती) में स्नान करते हैं।
  • घर और रसोईघर की सफाई की जाती है ताकि हर कोना पवित्र रहे।
  • सूर्य देव को जल अर्पित कर शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
  • इस दिन का भोजन होता है — कद्दू की सब्जी, चना दाल और चावल।
  • माना जाता है कि इस दिन का शुद्ध आचरण छठी माता की कृपा पाने का मार्ग खोलता है।

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सात्विक जीवन की शुरुआत और नियम

पंडितों के अनुसार ‘नहाय-खाय’ के साथ व्रती के सात्विक जीवन की शुरुआत होती है।

  • व्रती चार दिन तक केवल सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण अपनाते हैं।
  • इस दिन से व्रती हर तरह के विलास, नकारात्मकता और क्रोध से दूर रहते हैं।
  • शुद्धिकरण से व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • यह पर्व समाज में प्रकृति और अनुशासन के संतुलन का संदेश देता है।

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छठ पूजा की चार दिवसीय परंपरा

छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला अनुष्ठान है, जिसमें हर दिन का विशेष महत्व होता है

  1. पहला दिन – नहाय-खाय: शुद्धता और सात्विक जीवन की शुरुआत।
  2. दूसरा दिन – खरना: दिनभर उपवास और शाम को गुड़-चावल की खीर का भोग।
  3. तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर धन्यवाद।
  4. चौथा दिन – उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन।

इस पूरे पर्व में व्रती सूर्य देवता और छठी माता की पूजा करते हैं और जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य व संतुलन की कामना करते हैं।

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कौन रख सकता है छठ व्रत?

 

  • 18 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष और महिलाएं व्रत रख सकते हैं।
  • गर्भवती महिलाएं या शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति डॉक्टर की सलाह लेकर व्रत करें।
  • बच्चे माता-पिता के मार्गदर्शन में पूजा में भाग ले सकते हैं, लेकिन पूर्ण व्रत नहीं रखते।
  • व्रती को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।

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छठ पूजा करने की विधि 

  • सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी या तालाब में स्नान करें।
  • घर और रसोईघर की पूरी सफाई करें।
  • केवल सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करें।
  • सूर्य देवता को जल अर्पित करें और छठी माता की पूजा करें।
  • पूरे चार दिन तक सात्विकता और संयम का पालन करें।

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छठ पूजा का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व

  • यह पर्व प्रकृति और मानव के सामंजस्य का प्रतीक है।
  • व्रती अपनी आस्था से परिवार और समाज में सद्भाव, अनुशासन और प्रेम का संदेश देते हैं।
  • छठ पर्व को स्वास्थ्य, मन की शुद्धता और समृद्धि का माध्यम माना गया है।

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छठ पूजा का यह महापर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का उत्सव भी है। नहाय-खाय से शुरू होकर उषा अर्घ्य तक का हर चरण हमें आत्मसंयम, पवित्रता और कृतज्ञता का संदेश देता है। क्या आप भी छठ पूजा करते हैं या करना चाहते हैं? नीचे कमेंट करें और इस पवित्र पर्व की जानकारी सबके साथ शेयर करें। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

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