नई दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय देश की प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। मंत्रालय द्वारा ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) के जमीनी स्तर के कार्यप्रवाहों को पारदर्शी और गतिमान बनाने के लिए ‘पीएम-अजय’ पोर्टल और ‘पीएम-अजय’ मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया जाएगा। इस हाई-टेक पहल की शुरुआत माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार द्वारा माननीय राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा, विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में की जाएगी। इस खास मौके पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव और प्रशासनिक अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे।
यह नया डिजिटल प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से योजना के तीन बड़े घटकों—आदर्श ग्राम, कौशल विकास व रोजगार के लिए अनुदान सहायता, और शैक्षणिक संस्थानों में छात्रावासों के निर्माण—को पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल कर देगा। इस तकनीक के आने से सभी हितधारकों के बीच आपसी समन्वय बेहद आसान हो जाएगा और लाभार्थियों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं में तेजी और जवाबदेही आएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस नए पीएम-अजय डैशबोर्ड में देश के 47,000 से अधिक अनुसूचित जाति बहुल गांवों और सभी घटकों के अंतर्गत आने वाले 40 लाख से अधिक लाभार्थियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की पल-पल की प्रगति दर्ज की जाएगी। यह पोर्टल एक केंद्रीय डेटाबेस के रूप में काम करेगा, जिससे फंड का ट्रांसफर भी सीधे डिजिटल रूप से काम की प्रगति देखकर (माइलस्टोन-आधारित) किया जा सकेगा।
योजना के ‘आदर्श ग्राम’ घटक के तहत अब कागजों पर योजनाएं बनाने का दौर खत्म हो जाएगा और ग्राम स्तर पर पूरी तरह डिजिटल प्लानिंग की जाएगी। यह पोर्टल राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर एक समग्र डैशबोर्ड उपलब्ध कराएगा, जो 10 महत्वपूर्ण विकासात्मक क्षेत्रों के भीतर 50 सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर गांवों के विकास की निगरानी करेगा। जैसे ही ग्राम विकास योजना (वीडीपी) को डिजिटल मंजूरी मिलेगी, यह सिस्टम काम की ट्रैकिंग को ऑटोमैटिकली शुरू कर देगा। इसके अलावा, अनुदान सहायता (जीआईए) और छात्रावास घटक के तहत भी यह पोर्टल राज्यों के आजीविका फंड, वित्तीय व्यय और भवनों के निर्माण व मरम्मत की भौतिक प्रगति पर सीधी नजर रखने के लिए एक मजबूत मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (एमआईएस) के रूप में काम करेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
स्मार्टफोन यूजर्स और फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की सुविधा के लिए विकसित किया गया ‘पीएम अजय मोबाइल ऐप’ इस पूरी व्यवस्था को और आसान बना देगा। यह ऐप अधिकारियों को घर-घर जाकर ऑफलाइन सर्वे करने, व्यक्तिगत आजीविका पहलों और कौशल प्रशिक्षण की प्रगति को रियल-टाइम ट्रैक करने की सुविधा देगा। सबसे खास बात यह है कि छात्रावासों के निर्माण के दौरान भ्रष्टाचार और गड़बड़ी को रोकने के लिए इस ऐप में जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्प (समय और स्थान के प्रमाण के साथ) वाली तस्वीरें अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे दिल्ली में बैठे अधिकारी भी परियोजना स्थल की वास्तविक स्थिति का दृश्यात्मक सत्यापन कर सकेंगे।
एकीकृत लॉगिन प्रणाली, भूमिका-आधारित एक्सेस कंट्रोल और मोबाइल निरीक्षण जैसी बेहतरीन सुविधाओं से लैस यह डिजिटल मंच डेस्कटॉप पर निर्भरता को कम करेगा। मंत्रालय के अधिकारियों से लेकर जिला प्रशासन, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), और छात्रावास प्रशासकों तक, सभी इसका उपयोग करेंगे। निश्चित रूप से, यह लॉन्च समावेशी विकास और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के लिए डिजिटल सुशासन के प्रभावी उपयोग की दिशा में ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाला एक और बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

