प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्रेरक संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा करते हुए देश के युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया। प्रधानमंत्री ने भारतीय युवाओं की ऊर्जा, संवेदनशीलता और सामर्थ्य की सराहना करते हुए कहा कि हमारे युवा साथी देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की भी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने लिखा कि भारतीय युवाओं ने अपने सेवाभाव और अद्वितीय सामर्थ्य के बल पर पूरी दुनिया में एक अलग और खास पहचान बनाई है।
अपने विचार साझा करने के साथ ही प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर संस्कृत का श्लोक—“चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्। प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति।।”—भी पोस्ट किया। इस श्लोक का अर्थ है कि जो व्यक्ति अपनी दृष्टि, विचारों, वाणी और कर्मों के माध्यम से लोगों का हृदय जीत लेता है, वही समाज में लोगों के विश्वास, सम्मान और सद्भाव का पात्र बनता है। इस सुभाषित के जरिए प्रधानमंत्री ने युवाओं को श्रेष्ठ आचरण, सकारात्मक सोच और जनसेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर सोशल मीडिया पर भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और संस्कृत साहित्य से जुड़े सुभाषित साझा करते रहते हैं। इससे पहले मंगलवार को भी उन्होंने आठ मानवीय गुणों को रेखांकित करता एक श्लोक साझा किया था, जिसमें बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी की कुशलता, सामर्थ्य अनुसार दान और उपकारों के प्रति कृतज्ञता को जीवन को प्रकाशमान करने वाला बताया गया था।
इसी श्रृंखला में, इससे पहले उन्होंने सत्य ज्ञान व लोकहित से जुड़ा श्लोक और चंद्रमा के उदाहरण के माध्यम से बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के निरंतर दूसरों का हित करने वाला श्लोक भी पोस्ट किया था। पीएम मोदी द्वारा लगातार साझा किए जा रहे ये प्राचीन सुभाषित न केवल युवाओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण के लिए भी निरंतर प्रेरित करते हैं।

