रायपुर: छत्तीसगढ़ में टूरिज्म सेक्टर को नई रफ्तार देने और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड (CTB) की विभिन्न इकाइयों को लीज पर सौंपने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राजधानी रायपुर में ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर उच्चस्तरीय प्री-एनआईटी (Notice Inviting Tender) कॉन्फ़्रेंस का आयोजन किया गया। इस बैठक में देशभर के प्रमुख निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को पर्यटन बोर्ड के होटल, मोटल और रिसॉर्ट्स के संचालन, लीज-टेंडर नियमों, सरकारी सब्सिडी तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्राइम लोकेशन वाली संपत्तियों में निजी निवेश का मौका
पर्यटन मंडल की संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग और पर्यटकों को वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं देने के लिए निजी भागीदारी आमंत्रित की गई है:
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प्रॉपर्टीज का पोटेंशियल: छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि बोर्ड की अधिकांश संपत्तियां राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर स्थित हैं। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और पूंजी से इन रिसॉर्ट्स व मोटल्स को आधुनिक हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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पारदर्शी टेंडरिंग प्रक्रिया: निवेशकों की शंकाओं का समाधान करते हुए स्पष्ट किया गया कि लीज प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनाया गया है ताकि प्रतिष्ठित और अनुभवी ऑपरेटर इसमें हिस्सा ले सकें।
उद्योग का दर्जा मिलने से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने कहा कि राज्य में पर्यटन को ‘उद्योग’ का दर्जा दिए जाने के बाद निजी निवेश का माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है:
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सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार: बस्तर से लेकर सरगुजा तक सुरक्षा और कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आया है।
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संस्कृति और रोजगार का संगम: पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि पर्यटन विकास केवल सैर-सपाटे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का मुख्य जरिया बनेगा।
सिंगल विंडो सिस्टम, सब्सिडी और PPP मॉडल का रोडमैप
निवेशकों की राह आसान बनाने के लिए प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं को भी स्पष्ट किया गया:
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सिंगल विंडो क्लीयरेंस: निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए सभी अनुमतियां और स्वीकृतियां एक ही पोर्टल/मंच के माध्यम से देने की व्यवस्था की गई है।
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वित्तीय प्रोत्साहन व सब्सिडी: CSIDC के उप संचालक अमेय त्रिपाठी ने उद्योग नीति के तहत पर्यटन परियोजनाओं पर मिलने वाली सब्सिडी, पूंजीगत सहायता और सरकारी रियायतों का ब्यौरा रखा।
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PPP मॉडल का ढांचा: अर्नेस्ट एंड यंग (EY) के विशेषज्ञ अंकुर गर्ग ने सरकारी व निजी सहभागिता की संरचना, रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल और लंबे समय के संचालन लाभों पर रणनीति साझा की।
डिजिटल पहचान सत्यापन से सुगम होंगी सेवाएं
कॉन्फ़्रेंस में हॉस्पिटैलिटी और होटल सेक्टर में डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। यूआईडीएआई (UIDAI) के अधिकारियों ने डिजिटल व ऑफलाइन पहचान सत्यापन के सुरक्षित तरीकों और सिक्योर क्यूआर कोड तकनीक की जानकारी दी। इस डिजिटल व्यवस्था से होटलों में चेक-इन, दस्तावेजी सत्यापन और पुलिस समन्वय की प्रक्रिया को तेज, सुरक्षित और पूरी तरह पेपरलेस बनाया जा सकेगा।



