आदिवासी अंचलों में कुछ इस तरह मनता है फगुआ” …………….. जशपुर: जब फागुन की मदमस्त हवाएं पुराने पत्तों को विदा कर पुटकल (पाकड़) की टहनियों पर सिंदूरी कोंपलें सजाती हैं, तो समझ लीजिए कि छत्तीसगढ़ के सुदूरवर्ती जंगलों और झारखंड की वादियों में ‘पुटकल’ का उत्सव शुरू हो गया है। यह महज एक जंगली सब्जी … Continue reading दवा नहीं, वरदान है ‘पुटकल’:साल में सिर्फ 60 दिन का मेहमान: डायबिटीज से लेकर पेट के रोगों तक, कुदरत की इस ‘लाल पोटली’ में छिपा है हर इलाज”, ” चखिए उस ‘पुटकल’ का स्वाद, जिसके मुरीद हुए बड़े-बड़े शेफ”
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