जशपुरनगर: चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर समूचा जशपुरनगर भक्ति और आस्था के अनूठे रंग में सराबोर नजर आ रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार, गूंजते भजन-कीर्तन और चारों ओर लहराते भगवा ध्वजों ने शहर को पूरी तरह राममय बना दिया है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव यानी रामनवमी को यादगार बनाने के लिए इस वर्ष जशपुर में तैयारियों को भव्य स्वरूप दिया गया है, जिसे लेकर नगरवासियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
शोभायात्रा के उल्लास की शुरुआत बीते कल यानी गुरुवार, 26 मार्च की शाम से ही हो गई। महावीर मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य भजन संध्या और जागरण कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस विशेष धार्मिक आयोजन में देश की सुप्रसिद्ध भजन गायिका राधा श्रीवास्तव ने अपनी सुमधुर आवाज और भक्ति गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक चले इस कार्यक्रम में राधा श्रीवास्तव ने जब भगवान श्री राम के भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा परिसर जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु भक्ति संगीत की धुन पर झूमते नजर आए, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भजन संध्या की इस सफलता के बाद, आज शुक्रवार को दोपहर 3 बजे से मुख्य आयोजन यानी भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। श्रीराम नवमी पूजा समिति के अध्यक्ष बबला गुप्ता के नेतृत्व में इस वर्ष शोभायात्रा को विशेष रूप से आकर्षक बनाया गया है। महावीर मंदिर से शुरू होने वाली यह भव्य यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से होते हुए भागलपुर स्थित बीटीआई ग्राउंड पहुंचेगी, जहाँ इसका विधि-विधान से समापन होगा। पूरे मार्ग भर श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतीक्षारत हैं।
इस वर्ष की शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण महाराष्ट्र से आए विशेष ढोल-नगाड़ा वादक होंगे। भगवा परिधानों में सजे ये कलाकार अपनी पारंपरिक और ओजपूर्ण धुनों से पूरे वातावरण में जोश भर देंगे। उनके साथ ही दिल्ली से आमंत्रित विशेष कलाकार भगवान श्रीराम, माता सीता और संकटमोचन हनुमान के विशाल और जीवंत स्वरूप में शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। इन कलाकारों का भव्य रूप और झांकियां इस बार आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगी।
समिति के अध्यक्ष बबला गुप्ता ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस गौरवशाली आयोजन में सपरिवार अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। उन्होंने कहा कि रामनवमी का यह उत्सव न केवल हमारी अटूट धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी सामाजिक एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करता है।
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