उमेश कुमार प्रजापति
सरगुजा सीतापुर मैनपाट सरगुजा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस. एस. टुटेजा के मार्गदर्शन में भारत सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रव्यापी “खेती बचाओ अभियान” के अंतर्गत 01 जून से 30 जून तक कृषि विज्ञान केन्द्र मैनपाट द्वारा सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड के चयनित गांवों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक किसानों को कृषि भूमि की घटती उर्वरता, मिट्टी के कटाव, मृदा कार्बन में कमी, पोषक तत्वों की कमी, जल प्रदूषण तथा भूमि क्षरण जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करते हुए प्राकृतिक, जैविक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है।
शासन के निर्देशानुसार जिले में ग्राम पंचायत एवं विकासखंड स्तर पर कृषक संगोष्ठी, कृषि चौपाल, जनजागरूकता कार्यक्रम तथा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की जा रही हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे कृषि उत्पादन की स्थिरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरकों, हरी खाद, नील-हरित काई, जैविक खाद तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान आगामी खरीफ वर्ष 2026 को ध्यान में रखते हुए किसानों को विभिन्न फसलों के उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीकी सलाह भी दी गई। साथ ही उपस्थित किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं एवं प्रश्नों का वैज्ञानिकों द्वारा त्वरित समाधान किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक प्रदीप कुमार लकड़ा, डॉ. चंद्रमणि साहू, डॉ. सूरज चंद्र पंकज सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
खेती बचाओ अभियान” किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ते हुए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और दीर्घकालिक कृषि उत्पादन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।


