छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विगत दो वर्षों (2024–2026) में शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह द्वारा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।
शिक्षकों की उपलब्धता एवं युक्तियुक्तकरण (Rationalization)
: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया, जिससे 15,165 शिक्षकों व प्राचार्यों की सही तैनाती सुनिश्चित हुई। प्रदेश के 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पूर्ति तथा 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। विगत दो वर्षों में कुल 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गईं, जिनमें टी एवं ई संवर्ग मिलाकर 2,813 प्राचार्य तथा टी संवर्ग में 1,798 व्याख्याता शामिल हैं।
पारदर्शी शिक्षक भर्ती एवं डिजिटल परीक्षा प्रणाली
- दिव्यांग बच्चों के लिए 848 स्पेशल एजुकेटर के पद स्वीकृत किए गए हैं। पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की जा चुकी है, जबकि 5,000 पदों पर परीक्षा प्रक्रिया जारी है। स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहली बार राज्य स्तरीय ऑनलाइन सीबीटी (CBT) प्रणाली शुरू की गई है, जिसके तहत 3,066 संविदा पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है।
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और पाठ्यपुस्तक नवाचार
राज्य के विद्यालयों में 15 जुलाई 2024 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर दी गई है।कक्षा 1 और 2 की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को जोड़ा गया है। साथ ही, बच्चों की सहज समझ के लिए 16 स्थानीय एवं 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया गया है। कक्षा 1, 2, 3 और 6 के लिए एनसीईआरटी पुस्तकों का अनुकूलन भी किया गया है।
बहुभाषी शिक्षा और भाषा-चित्रण (Language Mapping)
छत्तीसगढ़ भाषा-चित्रण करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बस्तर संभाग में 2,700 और सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों को स्थानीय बोलियों (जैसे- छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी, सादरी) के माध्यम से पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
प्रशासनिक डिजिटलीकरण और ऑनलाइन उपस्थिति
शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और अनुशासन के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक और टीके ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जिससे प्रतिदिन लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित हो रही हैअवकाश प्रबंधन पोर्टल और ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी पहलों से प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है।
विद्यार्थियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं एवं सुविधाएं
- निःशुल्क सामग्री: सत्र के प्रारंभ में पुस्तकें मिलने से 45 लाख 33 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हुए।
- साइकिल और गणवेश: निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना से 1 लाख 62 हजार से अधिक बालिकाएं तथा कक्षा 1 से 8 तक के 28 लाख से अधिक बच्चों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया।
परीक्षा परिणामों में सुधार और सह-शैक्षणिक गतिविधियां
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विद्यार्थियों के तनावमुक्त और समग्र विकास के लिए हर शनिवार खेल, योग, लोककला और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
विद्यालय अधोसंरचना और उत्कृष्ट विद्यालय विस्तार
विगत तीन वर्षों में 504 नवीन विद्यालय स्वीकृत किए गए। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए प्रावधान किया गया है। शौचालयों के निर्माण हेतु 52 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय: वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के निर्माण और संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बस्तर, आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) क्षेत्रों में शिक्षा
बस्तर संभाग के 6 जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शालाएं स्थापित की गई हैं। दूरस्थ अंचलों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा अभियान के तहत 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। वर्तमान में 156 आवासीय संस्थानों में 33,000 से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
एआई-आधारित ‘विद्या समीक्षा केंद्र’
स्कूलों और योजनाओं की मैदानी मॉनिटरिंग के लिए एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र बनाया गया है। कॉल सेंटर के जरिए 1 लाख से अधिक फीडबैक लिए गए हैं, और पाठ्यपुस्तकों की बारकोड ट्रैकिंग से शासन को लगभग 40 करोड़ रुपये की बचत हुई है।


