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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे निलंबन और अपनी मर्जी के मुताबिक मनचाही जगह पदस्थापना पाने के खेल पर अब पूरी तरह से ब्रेक लगने जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शिक्षकों और बाबुओं की अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संयुक्त संचालकों (जेडी) और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता करने वाले शिक्षकों को निलंबित कर ‘राहत’ देने के बजाय, अब उन पर सीधे कड़ी प्रशासनिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में आया है कि कई शिक्षक शहर या उसके आसपास मनपसंद स्कूल न मिलने पर जानबूझकर ऐसी स्थितियां पैदा करते हैं जिससे उन्हें निलंबित कर दिया जाए, और बाद में बहाली कराकर मनचाही जगह पोस्टिंग हासिल कर ली जाए। विभाग अब इस प्रवृत्ति को पूरी तरह खत्म करने जा रहा है क्योंकि निलंबन कई बार शिक्षकों के लिए एक ‘सुविधाजनक विकल्प’ या रणनीति बन जाता था, लेकिन अब यह पैंतरा काम नहीं आएगा।

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गौरतलब है कि कुछ महीनों पहले प्रदेश के शिक्षकविहीन, एकल शिक्षकीय और कम शिक्षक वाले स्कूलों में व्यवस्था सुधारने के लिए युक्तियुक्तकरण के तहत सहायक शिक्षकों से लेकर व्याख्याताओं तक के तबादले किए गए थे। इसके बावजूद, लगभग 200 शिक्षकों ने अपनी नई पदस्थापना वाले स्कूलों में अब तक ज्वाइनिंग नहीं दी है। इन शिक्षकों का तर्क है कि उनके प्रतिवेदनों पर डीपीआई या स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, लेकिन अब विभाग ने रुख साफ करते हुए ज्वाइनिंग न देने वाले ऐसे शिक्षकों को और भी दूरस्थ व दुर्गम क्षेत्रों में भेजने का फैसला किया है।

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अनुशासन और जवाबदेही तय करने के लिए विभाग ने जो नई कार्ययोजना तैयार की है, उसके तहत अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी व्याख्याता के खिलाफ शिकायत मिलती है या वे नियमों की अनदेखी करते हैं, तो उनका तबादला सीधे 200 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में किया जा सकता है, जहाँ उनकी नियमित निगरानी होगी और लंबे समय तक उसी स्कूल में सेवाएं देना अनिवार्य होगा। वहीं दूसरी ओर, सहायक शिक्षकों और शिक्षकों को उनके संभाग के भीतर ही सबसे सुदूर और रिमोट एरिया के स्कूलों में पदस्थ किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मामला गंभीर पाया गया तो कार्रवाई केवल तबादले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सेवा नियमों के तहत विभागीय जांच शुरू कर कठोर दंड दिए जाएंगे। इस कड़े कदम से जहाँ एक ओर ‘निलंबन के खेल’ पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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