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महासमुंद (29 जनवरी 2026): छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और पुरातात्त्विक गौरव का प्रतीक ‘सिरपुर महोत्सव’ इस वर्ष 01 फरवरी से 03 फरवरी 2026 तक अत्यंत भव्य रूप में आयोजित होने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है।

आध्यात्मिक शुरुआत और महानदी सांध्य आरती

महोत्सव का शुभारंभ माघी पूर्णिमा की भोर में महानदी के पवित्र स्नान के साथ होगा। श्रद्धालु महानदी में पुण्य स्नान के पश्चात भगवान गंधेश्वर नाथ महादेव के अलौकिक दर्शन और पूजन करेंगे। इस महोत्सव की सबसे खास बात तीन दिनों तक होने वाली महानदी सांध्य आरती होगी, जो सिरपुर की आध्यात्मिक चेतना को जीवंत करेगी।

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विश्व पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर: विजन 2047

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के हेरिटेज स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • टूरिस्ट कॉरिडोर: ‘विजन 2047’ के तहत यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।

  • आधुनिक बुनियादी ढांचा: यहाँ सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अत्याधुनिक पुरातात्त्विक संरक्षण तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

  • डिजिटल टूरिज्म: पर्यटकों की जानकारी के लिए क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

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ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक महत्व

सिरपुर (प्राचीन श्रीपुर) दक्षिण कोसल के पांडुवंश के सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है। यहाँ की कुछ खास विशेषताएं इसे दुनिया से अलग बनाती हैं:

  • त्रिवेणी संगम: यह स्थल बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और विशाल बौद्ध विहारों के अवशेष मौजूद हैं।

  • लक्ष्मण मंदिर: यह भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर है, जो अपनी वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

  • विदेशी यात्री: 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्राओं में सिरपुर की ख्याति का उल्लेख किया है।

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पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएं

महोत्सव के दौरान दर्शकों और पर्यटकों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने विशेष बसों का प्रबंध किया है। रायपुर से कुहरी मोड़ तक और जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों से सिरपुर तक बसें नियमित अंतराल पर संचालित होंगी। साथ ही, स्थानीय समुदाय को रोजगार देने के लिए हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालयों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

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सिरपुर महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सहिष्णुता, कला और ज्ञान के संगम का जीवंत प्रमाण है। 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा खोजे गए इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा आज भी देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

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