नई दिल्ली: आखिरकार, 26 दिनों तक चले भूख हड़ताल के बाद, पर्यावरणविद और लद्दाख के सामाजिक नेता Sonam Wangchuk ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने यह बड़ा कदम सरकार से मिले लिखित आश्वासन के बाद उठाया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने रात के समय उनसे मुलाकात की, जिसमें लद्दाख एपेक्स बॉडी के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने पूरे देश का ध्यान खींचा है, क्योंकि इस दौरान पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में रहे।
लिखित आश्वासन के बाद टूटा 26 दिन का अनशन
Sonam Wangchuk ने बताया कि पिछले दो दिनों से उनकी केंद्र सरकार के साथ बातचीत चल रही थी। उनकी प्रमुख मांग थी कि सभी वादे मौखिक नहीं, बल्कि लिखित रूप में हों। यही कारण था कि निर्णय लेने में दो दिन और लगे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती, तो वे और भी लंबे समय तक अनशन जारी रखने को तैयार थे। अंततः, सरकार के लिखित आश्वासन के बाद, उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया।
सरकार ने किन मांगों पर भरोसा दिया?
सरकार के लिखित आश्वासन में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं:
- जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
- संसद में पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा की जाएगी।
- हाल के NEET पेपर लीक के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजे के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
इन वादों के बाद आंदोलन फिलहाल समाप्त कर दिया गया है, लेकिन इन आश्वासनों के क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।
65 सांसदों का समर्थन बना अहम कारण
अनशन के दौरान लगभग 65 सांसदों ने विभिन्न राजनीतिक दलों से Sonam Wangchuk से मुलाकात की। सांसदों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर उनसे अनशन खत्म करने की गुजारिश की और आश्वासन दिया कि संसद में परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके। इस राजनीतिक समर्थन ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद की।
अनशन खत्म होने के बाद सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
अनशन समाप्त करने के बाद, Sonam Wangchuk ने लद्दाख एपेक्स बॉडी के नेताओं, सांसदों और आंदोलन का समर्थन करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि 26 दिनों बाद उन्हें पहली बार खाना खाने का मौका मिला और खाने का स्वाद अच्छा लगा, लेकिन भूख का अपना कोई स्वाद नहीं होता। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे संघर्ष और धैर्य का प्रतीक मान रहे हैं।
Sonam Wangchuk का 26 दिन लंबा अनशन खत्म हो गया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार अपने लिखित आश्वासनों को कितनी जल्दी और किस प्रकार लागू करती है। पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के हितों से जुड़े फैसलों पर देश की नज़र बनी रहेगी। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

