भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई कंपनी के तीन प्रमुख शिशु आहार उत्पादों—एनएएन एक्सेला प्रो 1, लैक्टोजेन प्रो 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला—को लेकर की गई है। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि इन उत्पादों पर फिलहाल कोई प्रतिबंध (बैन) नहीं लगाया गया है।
एनएएन एक्सेला प्रो 1′ और ‘लैक्टोजेन प्रो 1’ के विज्ञापनों में ‘5 HMOs’, ‘वे प्रोटीन’ (Whey Protein) और इसके आसानी से पचने जैसे दावे किए गए थे। FSSAI का कहना है कि ये दावे ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (शिशुओं के पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) रेगुलेशन, 2020’ के रेगुलेशन 4(2) और ‘इन्फैंट मिल्क सब्स्टिट्यूट्स एक्ट, 1992’ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं, जो शिशु आहार के विज्ञापन और बिक्री बढ़ाने वाले प्रचार पर रोक लगाते हैं।
नेस्ले के एक फॉलो-अप फॉर्मूला के लैब परीक्षण में बायोटिन (विटामिन B7) की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है। रेफरल लैब की दोबारा जांच में भी यही परिणाम सामने आया।
FSSAI ने इन मामलों में तीन अलग-अलग मामलों की सुनवाई शुरू की है। अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण की जांच और कंपनी के जवाब के बाद ही सामने आएगा।
माता-पिता के लिए सलाह:
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल इस कानूनी नोटिस के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि उत्पाद असुरक्षित हैं। फिर भी, शिशुओं के लिए कोई भी आहार चुनते समय सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) से परामर्श जरूर लें।


