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नई दिल्ली
संसद का बजट सत्र आज बुधवार से शुरू हो रहा है। सत्र की शुरुआत लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी। इसके बाद एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। यह सत्र राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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मंगलवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने बजट सत्र के दौरान विकसित भारत जी राम जी अधिनियम और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की। सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि कोई कानून एक बार देश के सामने आ जाने के बाद उसका पालन करना अनिवार्य होता है और पीछे लौटना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष अपने मुद्दे राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट पर होने वाली चर्चा के दौरान उठा सकता है।
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बैठक में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास सहित कई विपक्षी नेताओं ने सत्र के लिए सरकारी विधायी एजेंडा पहले से साझा नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई। इस पर किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया कि यह वर्ष का पहला सत्र है और आम तौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद ही सरकारी कामकाज की सूची सामने रखी जाती है। उन्होंने कहा कि सदन को सुचारु रूप से चलाना सरकार की प्राथमिकता है।
रविवार को पेश होगा आम बजट
इस बार संसद के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पहली बार आम बजट रविवार को पेश किया जाएगा। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट प्रस्तुत करेंगी। सरकार ने इस दिन को आधिकारिक रूप से बजट डे घोषित किया है।
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बजट से पहले नॉर्थ ब्लॉक में पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद रहीं। यह रस्म बजट दस्तावेजों की गोपनीय प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
दो चरणों में चलेगा बजट सत्र
बजट सत्र दो चरणों में आयोजित होगा। पहला चरण आज से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद सत्र स्थगित रहेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलने की संभावना है। इस दौरान संसदीय समितियां बजट प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा करेंगी।
लंबित विधेयक और आर्थिक चुनौतियां
वर्तमान में लोकसभा में नौ महत्वपूर्ण विधेयक लंबित हैं जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 और संविधान संशोधन विधेयक 2024 शामिल हैं। यह बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अमेरिका की टैरिफ नीतियों और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का दबाव बना हुआ है।
महंगाई रोजगार बुनियादी ढांचे और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार वित्त वर्ष 2026 27 के लिए किस तरह का आर्थिक रोडमैप पेश करती है। बजट सत्र पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

