रायपुर: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुदृढ़ बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी सफलता हासिल की है। विधानसभा में प्रस्तुत नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 5,799 उचित मूल्य दुकानों का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा किया जा रहा है। यह पहल न केवल राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता ला रही है, बल्कि हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही है।
बिलासपुर और राजनांदगांव में समूहों का दबदबा राज्य सरकार द्वारा जारी जिलेवार सूची के अनुसार, बिलासपुर जिला महिला समूहों द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकानों की संख्या में सबसे ऊपर है, जहाँ 311 दुकानें महिलाएं संभाल रही हैं। इसके बाद राजनांदगांव में 308 और बेमेतरा में 304 दुकानों का संचालन महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। मुंगेली (295), रायगढ़ (286) और दुर्ग (283) जैसे जिलों में भी महिलाओं की सक्रियता काफी अधिक दर्ज की गई है।
बस्तर से सरगुजा तक महिलाओं का परचम दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में भी महिलाएं राशन वितरण की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। सरगुजा संभाग के सूरजपुर में 246, सरगुजा में 215 और बलरामपुर में 184 दुकानें महिलाओं द्वारा संचालित हैं। बस्तर संभाग की बात करें तो कांकेर में 167 और बस्तर जिले में 131 दुकानों की कमान महिला समूहों के पास है। नए जिलों में सारंगढ़-बिलाईगढ़ (272) और सक्ती (244) में भी महिलाओं की भागीदारी काफी उत्साहजनक है।
पारदर्शिता और सुगम वितरण पर जोर सरकार का मानना है कि महिला समूहों को राशन दुकानों की जिम्मेदारी सौंपने से स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ी है और राशन की कालाबाजारी पर लगाम लगी है। ‘नारायणपुर’ जैसे छोटे जिलों में भी 11 और ‘सुकमा’ में 32 दुकानें महिला समूहों को आवंटित की गई हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि राज्य के हर कोने में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।



