यूरोप

जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के कारण यूरोप इस समय भीषण और जानलेवा गर्मी की चपेट में है. महाद्वीप से आए नए और डराने वाले आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रत्याशित रूप से बढ़े तापमान और लू (हीटवेव) के कारण अब तक लगभग 10,000 लोगों की मौत हो चुकी है. जून के अंत में तेज तापमान ने यूरोप के कुछ हिस्सों में अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिससे मौतों के आंकड़ों में अचानक भारी उछाल देखा गया.

जर्मनी में सबसे ज्यादा तबाही, मृतकों में बुजुर्ग सबसे अधिक

जारी आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी इस साल गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं. जून के अंत में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के चलते अकेले जर्मनी में जुलाई की शुरुआत तक 6,830 लोगों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 6,470 लोगों की उम्र 65 वर्ष या उससे अधिक थी.

इसके अलावा, अन्य देशों का हाल भी बेहद चिंताजनक रहा है:

  • बेल्जियम: 18 जून से 1 जुलाई के बीच भीषण गर्मी के कारण 1,747 से अधिक अतिरिक्त मौतें हुईं.

  • स्पेन: लू के चलते करीब 937 लोगों की जान चली गई.

  • नीदरलैंड: इस साल भीषण गर्मी के कारण करीब 480 लोगों की मौत दर्ज की गई.

  • ब्रिटेन: मई-जून के दौरान सिर्फ इंग्लैंड और वेल्स में गर्मी की वजह से करीब 2,700 लोगों की मौत हुई.

  • फ्रांस: यहां 22-28 जून के बीच, उसके ठीक पिछले सप्ताह के मुकाबले 2,000 अधिक मौतें रिकॉर्ड की गईं.

यूरोएमओएमओ (EuroMOMO) के चौंकाने वाले आंकड़े

यूरोएमओएमओ द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 28 जून को खत्म हुए सप्ताह में यूरोप में करीब 14,260 अधिक (अतिरिक्त) मौतें हुईं. हैरान करने वाली बात यह है कि इन मौतों में से 12,000 से अधिक मौतें 65 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की थीं. यह उस एक हफ्ते में हुई कुल 84,583 मौतों का हिस्सा था.

आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है संख्या

जानकारों और अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि पूरी स्थिति को गहराई से समझने में अभी समय लगेगा, क्योंकि गर्मी से होने वाली कई मौतों को आधिकारिक तौर पर ‘गर्मी के कारण’ दर्ज नहीं किया जाता. उदाहरण के लिए, भीषण गर्मी के चलते उम्रदराज और पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ सकता है. लेकिन उनकी मृत्यु होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत की असली वजह लू न लिखकर केवल ‘दिल का दौरा’ लिख दिया जाता है.

लगातार बढ़ रही है जानलेवा आपदाओं की आवृत्ति

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) में लगातार हो रही बढ़ोतरी की वजह से ऐसी जानलेवा प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति (बार-बार आना) बहुत तेजी से बढ़ रही है. पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में कई बार ऐसी भयानक गर्मी पड़ी है जिसने हजारों लोगों को अपना शिकार बनाया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, गर्मियों की यह शुरुआत बेहद चिंताजनक है और यदि पर्यावरण संतुलन को लेकर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है.

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