आधुनिकता के शोर में कहीं गुम हो गई गाँव की ‘बांस वाली पिचकारी

आदिवासी अंचलों में कुछ इस तरह मनता है फगुआ” …………….. ​होली का त्योहार आते ही अब बाजारों में चीनी प्लास्टिक की बंदूकों, मोटराइज्ड वॉटर गन्स और न जाने कितने तरह के फैंसी गैजेट्स की बाढ़ आ जाती है। लेकिन इस चमक-धमक के बीच, गाँव की वह पारंपरिक बांस की पिचकारी कहीं ओझल हो गई है। … Continue reading आधुनिकता के शोर में कहीं गुम हो गई गाँव की ‘बांस वाली पिचकारी