कुनकुरी (जशपुर) में प्राथमिक शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को अधिक प्रभावी व रोचक बनाने के उद्देश्य से आयोजित संकुल अकादमिक समन्वयकों (CACs) का तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय सलियाटोली में आयोजित इस कार्यशाला में विकासखंड के 16 संकुलों के समन्वयकों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला में लंग्वेज एन्ड लर्निंग फाउंडेशन के सीनियर स्पेशलिष्ट संजय गुलाटी,जिला समन्वयक दीपक सिंह और जिला अकादमीक समन्वयक सनत कुमार बघेल के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ
मातृभाषा और बहुभाषी शिक्षा पर विशेष जोर
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और बुनियादी स्तर की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFFS-2022) के तहत बहुभाषी शिक्षा की अवधारणा को जमीन पर उतारना था। जशपुर जिले में बच्चे सादरी, कुड़ुख, हल्बी, गोंडी जैसी स्थानीय भाषाएँ बोलते हैं। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि यदि शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को उनकी मातृभाषा (घर की भाषा) का सहारा दिया जाए, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बिना किसी डर के शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इसी मजबूत आधार पर वे आगे चलकर हिंदी और अन्य भाषाएँ भी सहजता से सीख सकेंगे।
कार्यशाला में समन्वयकों को यह समझाया गया कि उनका कार्य केवल निरीक्षण करना या कमियाँ निकालना नहीं, बल्कि शिक्षकों के एक साथी और मार्गदर्शक के रूप में उनका हाथ थामना है।
बच्चों में सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने के कौशलों को एक साथ और संतुलित रूप से विकसित करने की विधियों पर चर्चा हुई।
मल्टीग्रेड कक्षाओं का प्रबंधन:
एक ही कमरे में अलग-अलग स्तर के बच्चों को एक साथ पढ़ाने की व्यावहारिक तकनीकों और चुनौतियों के समाधान पर बात की गई।
बिग बुक, सचित्र कहानियाँ, सादरी व हिंदी के चित्र चार्ट, कविता पोस्टर और अक्षर कार्ड जैसी सामग्रियों के नियमित कक्षा उपयोग को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सुदर्शन पैंकरा और विकासखंड स्रोत समन्वयक (BRCC) बिपिन अम्बष्ठ ने समन्वयकों का उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने कहा कि संकुल समन्वयक शिक्षा व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी हैं। उन्होंने आह्वान किया कि कागजी प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर कक्षाओं में बच्चों के चेहरों की मुस्कान और उनके सीखने के उत्साह को अपनी सफलता का पैमाना बनाएं।
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद कुनकुरी विकासखंड के 16 संकुलों के समन्वयक अपने क्षेत्रों के 83 प्राथमिक विद्यालयों का नियमित भ्रमण करेंगे। वे कक्षाओं में जाकर शिक्षकों को टीएलएम के प्रभावी उपयोग और बहुभाषी वातावरण के निर्माण में अकादमिक सहयोग देंगे, जिससे बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान की नींव मजबूत हो सके।


