रायपुर: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पारदर्शिता और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर विकास की एक नई इबारत लिखी है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र को कागजी घोषणाओं से निकालकर धरातल पर उतारते हुए सरकार ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित की है। गांव, गरीब, किसान, महिला सशक्तिकरण और सुदूर वनांचल बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उठाए गए कदमों ने राज्य की तस्वीर बदल दी है।
“सरकार का मुख्य उद्देश्य योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर राज्य की व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन लाना है।”— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
आवास और अन्नदाता: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली ऐतिहासिक मजबूती
सरकार ने गठन के पहले ही दिन से प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया था, जिसका सबसे बड़ा प्रभाव आवास और कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है:
24.40 लाख आवास स्वीकृत:
सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के पीएम आवास को मंजूरी दी गई थी। अब तक कुल 24.40 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 11 लाख से अधिक पक्के मकान लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। प्रदेश में रोजाना औसतन 1,600 पक्के मकान तैयार हो रहे हैं।
धान खरीदी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड:
किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का भुगतान कर सरकार ने अन्नदाताओं की जेब में सीधी समृद्धि डाली है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की बंपर खरीदी की गई। ‘कृषक उन्नति योजना’ के जरिए लगभग ₹43,723 करोड़ सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित किए गए।
साय सरकार की नीतियों के केंद्र में महिलाएं प्रमुखता से रही हैं:
महतारी वंदन योजना:
इस योजना की 31 किस्तों के जरिए प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को ₹20,000 करोड़ से ज्यादा की आर्थिक सहायता सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है।
13.85 लाख लखपति दीदी:
स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं 13.85 लाख ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
पंजीयन शुल्क में 50% छूट:
महिलाओं के नाम पर अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर सरकार ने पंजीयन शुल्क में 50 फीसदी की बड़ी छूट देकर उन्हें संपत्ति की वास्तविक स्वामिनी बनाया है।
बस्तर में शांति और विकास: सुरक्षा कैंप बने ‘सेवा केंद्र’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त मिली है। बंदूक की जगह अब विकास की गूंज सुनाई दे रही है:
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सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित कैंप अब केवल सुरक्षा तक सीमित न रहकर ‘सेवा और विकास केंद्रों’ के रूप में काम कर रहे हैं।
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नियद नेल्ला नार 2.0 योजना के तहत घोर नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर इलाकों में एजुकेशन सिटी का निर्माण और ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ शुरू होने से वनांचल के लोगों का जीवन सुगम हुआ है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में देश का सिरमौर बना छत्तीसगढ़
निवेश और रोजगार के मोर्चे पर छत्तीसगढ़ ने देश भर में मिसाल पेश की है:
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पहला राज्य: छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने ऐतिहासिक ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026’ लागू किया है।
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व्यापारिक सुधार: राज्य में 450 से अधिक व्यापारिक सुधार लागू किए गए। ‘जन विश्वास’ पहल के तहत 279 गैर-गंभीर व छोटे नियमों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया।
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₹8 लाख करोड़ का निवेश: वन-क्लिक सिंगल विंडो क्लीयरेंस और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के चलते राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के नए औद्योगिक निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
साय सरकार के ढाई साल: 5 बड़े मील के पत्थर
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छत का सपना साकार: 24.40 लाख आवास मंजूर; प्रतिदिन 1,600 मकान पूरे करने की अभूतपूर्व गति।
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अन्नदाता का सम्मान: ₹3,100 प्रति क्विंटल धान दर; 141.04 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड तोड़ खरीदी।
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नारी शक्ति का उत्थान: महतारी वंदन योजना से ₹20,000 करोड़ से अधिक की सीधी सहायता; 13.85 लाख लखपति दीदियां।
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बदलता बस्तर: सुरक्षा कैंपों के जरिए स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा का विस्तार; नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार।
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निवेश और रोजगार क्रांति: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट लागू करने वाला देश का पहला राज्य; ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव।

