रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को विवश मासूम बच्चों की व्यथा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। जिले के मैनपुर ब्लॉक में पिछले छह वर्षों से अधूरे पड़े पुल और उफनती पैरी नदी को संकरी लोहे की सीढ़ी के सहारे पार करते बच्चों की मीडिया रिपोर्ट का आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर हनन मानते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
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फिसलन भरी सीढ़ियों और उफनती पैरी नदी के बीच गुजरता बचपन
आयोग ने संज्ञान लेते हुए रेखांकित किया कि मैनपुर ब्लॉक के खंभाथा और आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए रोज जानलेवा जोखिम उठाना पड़ रहा है:
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लोहे की संकरी सीढ़ी का सहारा: बारिश के मौसम में उफान पर रहने वाली पैरी नदी को पार करने के लिए बच्चे अधूरे पुल से बंधी एक बेहद संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी चढ़ने को मजबूर हैं।
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हादसे की निरंतर आशंका: जरा सी चूक बच्चों को सीधे तेज बहाव वाली नदी में गिरा सकती है। बुनियादी ढांचे की भारी कमी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण मासूम छात्र अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए हर दिन जान दांव पर लगा रहे हैं।
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6 साल से बन रहा 300 मीटर का पुल, अधिकारियों का दावा निकला हवा-हवाई
3 सितंबर 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विकास कार्यों की लेटलतीफी ने ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान ले लिया है:
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छह वर्षों से अधूरा निर्माण: मैनपुर ब्लॉक के देहरगुडा और खंभाथा के बीच लगभग 300 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण कार्य पिछले छह साल से कछुआ गति से चल रहा है।
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झूठा आश्वासन: संबंधित विभागीय अधिकारियों ने करीब एक वर्ष पहले स्थानीय ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि पुल का काम छह महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन यह आश्वासन आज तक अधूरा ही रहा।
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आयोग की दो टूक: ‘यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन’
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यदि प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के तथ्य सही हैं, तो यह सीधे तौर पर मासूम बच्चों के जीवन की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार जैसे बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के अंदर मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जिसमें पुल निर्माण में हो रही देरी के कारणों, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और बच्चों की तात्कालिक सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का स्पष्ट ब्योरा शामिल हो।



