छत्तीसगढ़ राज्य ने प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और प्रबंधन में एक युगांतरकारी उपलब्धि हासिल की है, जहाँ लीथियम खदान की नीलामी करने वाला यह देश का पहला राज्य बनकर उभरा है। कोरबा जिले के कटघोरा में शुरू होने वाली यह परियोजना न केवल भारत के ‘नेशनल क्रिटिकल मिशन’ को मजबूती देगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अभूतपूर्व अवसर भी पैदा करेगी।
इस प्रगति का सीधा असर राज्य के खजाने पर भी दिख रहा है। राज्य गठन के समय जहाँ खनिज राजस्व मात्र 429 करोड़ रुपये था, वहीं अब इसके 17,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक लक्ष्य तक पहुँचने की संभावना है। दिसंबर 2025 तक ही राज्य ने 10,345 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर लिया है, जो देश के कुल खनिज उत्पादन में छत्तीसगढ़ की 17 प्रतिशत हिस्सेदारी को प्रमाणित करता है।
प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने राज्य डीएमएफ पोर्टल 2.0 लॉन्च किया है। इसके माध्यम से जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के तहत प्राप्त 16,742 करोड़ रुपये के फंड और उससे स्वीकृत 1.07 लाख से अधिक विकास कार्यों की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। अब तक लगभग 76,000 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जो सीधे तौर पर खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर को सुधार रहे हैं।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, सरकार केवल वर्तमान खदानों तक सीमित नहीं है। बस्तर और सुकमा जैसे जिलों में लीथियम, नियोबियम और टेंटेलम जैसे दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) की खोज के लिए प्राइवेट सेक्टर की एजेंसियों के माध्यम से विशेष परियोजनाएं शुरू की गई हैं। राष्ट्रीय खनिज खोज विकास न्यास (NMEDT) में जमा 1,159 करोड़ रुपये की राशि इस अन्वेषण कार्य को गति प्रदान कर रही है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने में छत्तीसगढ़ की भूमिका को निर्णायक बनाएगी।

