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नई दिल्ली/रायपुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को यूडीआईएसई+ (Unified District Information System for Education Plus) 2025-26 की रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में कई सकारात्मक बदलाव सामने आए हैं। शिक्षकों की संख्या बढ़ने से लेकर छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में सुधार, स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी, ट्रांजिशन रेट में बढ़ोतरी और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार तक, शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ड्रॉपआउट दर में देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.3 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत रह गई, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह 8.2 प्रतिशत से घटकर 7.0 प्रतिशत हो गई। इसका अर्थ है कि अब पहले की तुलना में अधिक बच्चे स्कूल में बने हुए हैं और बीच में पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या कम हुई है। मंत्रालय ने इसे विद्यार्थियों को स्कूल से जोड़े रखने के लिए चलाए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया है।

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रिपोर्ट में ट्रांजिशन रेट में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। आधारभूत स्तर से प्रारंभिक स्तर तक पहुंचने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 98.6 से बढ़कर 99.2, प्रारंभिक से मध्य स्तर का 92.2 से बढ़कर 93.8, जबकि मध्य से माध्यमिक स्तर का ट्रांजिशन 86.6 प्रतिशत से बढ़कर 88.3 प्रतिशत हो गया। इससे स्पष्ट है कि पहले की तुलना में अधिक विद्यार्थी अगली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं और शिक्षा की निरंतरता बेहतर हुई है।

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शिक्षकों की उपलब्धता में भी सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2022-23 की तुलना में 2025-26 तक देश में शिक्षकों की संख्या में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा अनुशंसित सीमा से बेहतर स्तर पर पहुंच गया है। फाउंडेशनल स्तर पर PTR 10, प्रारंभिक स्तर पर 12, मध्य स्तर पर 17 तथा माध्यमिक स्तर पर 21 दर्ज किया गया है। इससे विद्यार्थियों को अधिक व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलने की संभावना बढ़ी है।

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डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति सामने आई है। कंप्यूटर सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत 64.7 से बढ़कर 69.9 और इंटरनेट सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत 63.5 से बढ़कर 67.4 हो गया है। यह संकेत देता है कि देश के विद्यालय तेजी से डिजिटल शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं।

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बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी सुधार दर्ज किया गया है। अब 95 प्रतिशत विद्यालयों में बिजली, 99.5 प्रतिशत में पेयजल, 98.5 प्रतिशत में छात्राओं के लिए शौचालय, 97.2 प्रतिशत में छात्रों के लिए शौचालय तथा 96.9 प्रतिशत विद्यालयों में हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा के लिए रैंप और हैंडरेल वाले विद्यालयों का प्रतिशत बढ़कर 58.2 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि एकल शिक्षक वाले विद्यालयों और शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की संख्या में लगातार कमी आई है। पिछले वर्ष की तुलना में एकल शिक्षक विद्यालयों में लगभग 3 प्रतिशत तथा शून्य नामांकन वाले विद्यालयों में लगभग 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो शिक्षा प्रशासन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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महिला भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 में कुल शिक्षकों में 54.9 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि छात्राओं का नामांकन बढ़कर 48.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मंत्रालय के अनुसार यह शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हालांकि रिपोर्ट कई सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर नामांकन और ट्रांजिशन दर को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में विद्यालयों तक पहुंच, शिक्षकों की उपलब्धता, डिजिटल संसाधनों और परिवहन जैसी चुनौतियों पर अभी भी लगातार काम करने की जरूरत बनी हुई है।

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