विदेश में रह रहे भारतीयों को भी मिलेगी बड़ी राहत
मुंबई: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन को अधिक सुगम, तीव्र और प्रभावी बनाने के लिए बैंकों और पार्टनर संस्थानों हेतु एक नया सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) जारी किया है। UIDAI के चेयरमैन नीलकंठ मिश्रा ने मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में 8 से 11 सितंबर तक आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान इस नई तकनीक की घोषणा की। इस नई प्रणाली के जरिए बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान आधार फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया को अपने स्थानीय (लोकल) सर्वर पर ही प्रोसेस कर सकेंगे।
नए SDK से क्या बदलेगा? बैंक अपने स्तर पर कर सकेंगे प्रोसेस
अब तक हर ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को UIDAI के केंद्रीय सिस्टम तक भेजना अनिवार्य होता था। नए SDK के आने के बाद:
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लोकल प्रोसेसिंग: बैंक और पार्टनर संस्थान फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया को अपने सर्वर पर स्थानीय स्तर पर प्रोसेस कर पाएंगे, जिससे वेरिफिकेशन की रफ्तार बढ़ेगी।
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संस्थानों का नियंत्रण: संस्थानों को अपने वेरिफिकेशन सिस्टम पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा और वे अपनी जरूरतों के अनुरूप इसे प्रबंधित कर सकेंगे।
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केंद्रीय सिस्टम की सुरक्षा: सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी। स्थानीय स्तर पर होने वाला कोई भी संभावित सुरक्षा जोखिम UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस को प्रभावित नहीं करेगा।
विदेश में रह रहे भारतीयों को बड़ी राहत
इस नई तकनीक से जियो-फेंसिंग की मौजूदा सीमाओं को सुगम बनाने में सहायता मिलेगी। इसका सीधा लाभ उन प्रवासी भारतीयों (NRIs) और विदेश यात्रा करने वाले नागरिकों को मिलेगा, जिन्हें विदेशों में रहते हुए पहचान सत्यापन की जरूरत पड़ती है।
प्रतिदिन 10 करोड़ ट्रांजैक्शन, 30 करोड़ की तैयारी
UIDAI चेयरमैन ने बताया कि डिजिटल पहचान सत्यापन के इस्तेमाल में भारी उछाल आया है:
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लेन-देन में तेजी: कुछ समय पहले तक जहां प्रतिदिन 7 करोड़ ट्रांजैक्शन होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर रोजाना 10 करोड़ तक पहुंच चुका है।
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भविष्य का खाका: बढ़ती मांग को देखते हुए UIDAI अपने तकनीकी ढांचे को दैनिक आधार पर 25 से 30 करोड़ ऑथेंटिकेशन संभालने के लिए तैयार कर रहा है।
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विशाल डेटाबेस: वर्तमान में 600 से अधिक संस्थाएं इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही हैं। UIDAI के डेटाबेस में लगभग 1.44 अरब (144 करोड़) नागरिकों का डेटा सुरक्षित रूप से दर्ज है, जबकि आधार मोबाइल ऐप के डाउनलोड की संख्या भी 6 करोड़ पार कर चुकी है।
फिनटेक सेक्टर और आम नागरिकों को क्या होगा फायदा?
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में जुपिटर के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी जितेंद्र गुप्ता ने रेखांकित किया कि आधार ने देश में डिजिटल फिनटेक क्रांति को गति दी है और कंपनियों के लिए ग्राहकों की ऑनबोर्डिंग को तेज व पारदर्शी बनाया है।
नए SDK के लागू होने से आम नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं तक पहुंच और आसान होगी। बैंकों द्वारा फेस ऑथेंटिकेशन को अपनी ऐप और सेवाओं में आसानी से जोड़े जाने के बाद खाता खोलने, लोन लेने या अन्य बैंकिंग सेवाओं के दौरान सत्यापन प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।


