देश में शिक्षा व्यवस्था से कटे हुए बच्चों और युवाओं को दोबारा सीखने के अवसरों से जोड़ने के लिए एक बड़े ‘जन-आंदोलन’ की शुरुआत होने जा रही है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा आयोजित एक हालिया बैठक में इस महत्वाकांक्षी पहल की रूपरेखा साझा की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य शैक्षिक समावेशन को बढ़ावा देना और समाज के हर तबके तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना है।
इस बैठक को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि शिक्षा केवल साक्षरता नहीं, बल्कि आशा, गरिमा और अवसर का प्रतीक है। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि आज हमारे सामने मुख्य चुनौती उन बच्चों तक पहुंचने की है, जो किसी भी वजह से शिक्षा प्रणाली से पूरी तरह कटे हुए हैं। उन्होंने इस नई पहल को एक ऐसा ‘जन-आंदोलन’ बताया जो लचीले और समावेशी शैक्षिक माध्यमों के जरिए बच्चों तथा युवाओं को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगा।
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए एनआईओएस के सचिव कर्नल शकील अहमद ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने इसके संचालनात्मक ढांचे को समझाते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के तहत स्कूल न जाने वाले बच्चों की सटीक पहचान और उनका वर्गीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र में एनआईओएस फैसिलिटेटर्स की तैनाती की जाएगी और पूरे तंत्र पर नजर रखने के लिए ऐप-आधारित मैपिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग होगा। बच्चों को आकर्षित करने के लिए एक विशेष प्रोत्साहन तंत्र और जिला-स्तरीय एकीकरण रणनीतियाँ भी लागू की जाएंगी।
इस पहल के शुरुआती कार्यान्वयन के लिए देश के उन पायलट जिलों को चुना गया है जहाँ स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या बहुत अधिक है। पहले चरण में यह नई पहल देश के 10 जिलों में लागू की जाएगी, जिनमें ओडिशा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और दिल्ली के जिले शामिल हैं। इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए संबंधित राज्यों के साथ ‘प्रतिबद्धता ज्ञापन’ (MoC) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इन शुरुआती जिलों से मिलने वाले अनुभवों और सीख के आधार पर बाद में इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा।
बैठक में भाग लेने वाले विभिन्न राज्यों और जिला प्रशासनों ने इस पहल को सफल बनाने के लिए अपने पूर्ण सहयोग और समर्थन का आश्वासन दिया है। इस दौरान राज्यों से प्रासंगिक डेटा साझा करने और इस रूपरेखा को अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव देने का भी अनुरोध किया गया। अंत में, इस महत्वपूर्ण बैठक का समापन एक सामूहिक और दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि देश का कोई भी बच्चा शिक्षा प्रणाली से बाहर न छूटे और सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास तथा एक गरिमामय भविष्य के समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।


