टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत: आयकर वसूली में गिरफ्तारी और सिविल जेल के नियम खत्म, CBDT ने बदला नियम 225
नई दिल्ली: दैनिक उपयोग के पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को लेकर केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में बड़ा फैसला लिया है। अब साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक्स) की पैकेजिंग पर शाकाहारी (वेज) और मांसाहारी (नॉन-वेज) की पहचान के लिए कलर कोडिंग अनिवार्य कर दी गई है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है और नए नियम सोमवार से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। इस फैसले से ग्राहक केवल एक निशान देखकर यह जान सकेंगे कि संबंधित उत्पाद में शाकाहारी सामग्री है या पशु आधारित तत्व।
Relway : बिलासपुर-बक्सर एक्सप्रेस रद्द, दरभंगा और रक्सौल स्पेशल का रूट बदला
नियमों में हुआ संशोधन, मुख्य डिस्प्ले पर लगाना होगा निशान केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को पारदर्शी विकल्प उपलब्ध कराने के लिए ‘विधिक मापविज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011’ [Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011] में संशोधन किया है:
-
हरा डॉट (Green Dot): पूर्णतः शाकाहारी और वनस्पति आधारित तत्वों से बने उत्पादों पर हरे रंग का स्पष्ट बिंदु अंकित होगा।
-
लाल या भूरा डॉट (Red/Brown Dot): ऐसे उत्पाद जिनमें जानवरों से प्राप्त तत्व, वसा या पशु-आधारित बाई-प्रोडक्ट्स शामिल हैं, उन पर लाल या भूरे रंग का निशान अनिवार्य रहेगा।
-
मुख्य पैनल के ऊपर स्थान: नियमों के अनुसार, यह निशान पैकेज के ‘प्रिंसिपल डिस्प्ले पैनल’ (सामने वाले हिस्से) के सबसे ऊपरी हिस्से पर होना चाहिए, ताकि स्टोर या मॉल में खरीदारी करते समय उपभोक्ता की नजर सबसे पहले इस पर पड़े।
26 से 30 सितंबर तक लगातार 5 दिन बंद रह सकते हैं बैंक! UFBU की तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी
इन सभी प्रोडक्ट्स की बदलेगी पैकेजिंग इस नए नोटिफिकेशन के दायरे में रोजमर्रा की टॉयलेटरीज और कॉस्मेटिक्स की विस्तृत श्रृंखला शामिल की गई है:
-
साबुन, बॉडी वॉश, हैंडवॉश और बाथिंग बार
-
शैम्पू, हेयर कंडीशनर और हेयर ऑयल
-
टूथपेस्ट, टूथपाउडर और ओरल केयर उत्पाद
-
सभी प्रकार की स्किन क्रीम, लोशन, लिपस्टिक और अन्य कॉस्मेटिक्स
कंपनियों को बदलनी होगी पैकेजिंग, लंबी अवधि में मिलेगा लाभ सरकार के इस फैसले के बाद एफएमसीजी और कॉस्मेटिक कंपनियों को अपनी मौजूदा व पुरानी पैकेजिंग डिजाइन में तत्काल बदलाव करना होगा। बाजार से पुरानी खेप समाप्त होने के बाद आने वाले सभी नए लॉट में यह लेबलिंग अनिवार्य रूप से दिखेगी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में कंपनियों को री-पैकेजिंग और इन्वेंट्री अपडेशन के स्तर पर कुछ तकनीकी व लॉजिस्टिक दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक रूप से इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ब्रांड्स के प्रति ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा।
नौकरी लगाने के नाम पर 3.55 लाख की ठगी मामले में पुलिस ने 1 आरोपी को किया गिरफ्तार


